Beawar-Bharatpur Expressway: राजस्थान में नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है. इन्हीं महत्वपूर्ण परियोजनाओं में ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भी शामिल है. इस कॉरिडोर का मकसद राजस्थान के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करना है. इसके साथ ही दिल्ली-NCR, अजमेर, जयपुर और भरतपुर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है.
हालांकि, इस परियोजना को लेकर एक जरूरी अपडेट है. पुराने प्रस्ताव में इसकी लंबाई करीब 342 किलोमीटर बताई गई थी, लेकिन सितंबर 2026 की हालिया रिपोर्टों में अलग लंबाई और नए अलाइनमेंट की जानकारी सामने आई है. मौजूदा चरण में DPR, सर्वे और दूसरी मंजूरियों की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए अंतिम रूट और लंबाई को आधिकारिक मंजूरी के बाद ही निश्चित माना जाना चाहिए.
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क्या है ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे का प्लान?
शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को NH-58 के पास ब्यावर से शुरू होकर NH-21 के पास भरतपुर तक ले जाने की योजना थी. इस पुराने प्रस्ताव की लंबाई करीब 342 किलोमीटर बताई गई थी. इसमें गुलाबपुरा, केकड़ी, टोडारायसिंह, उनियारा, टोंक और निवाई जैसे क्षेत्रों को जोड़ने की बात सामने आई थी.
राजस्थान सरकार ने इसके DPR की तैयारी के लिए कंसल्टेंसी का टेंडर भी जारी किया था. राजस्थान के ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड में ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे के लिए 4 या 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की DPR तैयार करने का काम दर्ज है.
अब रूट और लंबाई में बदलाव की चर्चा
सितंबर 2026 की हालिया रिपोर्टों के अनुसार परियोजना का प्रस्तावित कॉरिडोर अब पहले बताए गए 342 किलोमीटर के रूट से अलग हो सकता है. एक रिपोर्ट में इसे करीब 277 किलोमीटर का 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बताया गया है, जो जयपुर के दूदू क्षेत्र से शुरू होकर भरतपुर के ऊंचा नगला तक जाने की बात कहती है. इस प्रस्तावित अलाइनमेंट में जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर क्षेत्र शामिल बताए गए हैं.
लेकिन रूट सर्वे और मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी होने तक गांव स्तर का अलाइनमेंट अंतिम नहीं माना जाना चाहिए. हालिया रिपोर्ट में भी इसे अभी DPR, सर्वे और पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में बताया गया है.
दिल्ली और अजमेर के सफर पर क्या असर पड़ेगा?
इस एक्सप्रेसवे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली-NCR और अजमेर के बीच संभावित कनेक्टिविटी को लेकर है. रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना और इससे जुड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क के पूरा होने के बाद दिल्ली से अजमेर की यात्रा करीब 4.5 से 5 घंटे में पूरी होने का अनुमान है. फिलहाल सड़क मार्ग से इस सफर में लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं.
इसी तरह दिल्ली से भरतपुर की यात्रा का समय करीब ढाई से तीन घंटे तक आने का अनुमान रिपोर्टों में दिया गया है. ब्यावर से भरतपुर के बीच यात्रा भी करीब 3 से 3.5 घंटे में होने का अनुमान है. ये अनुमानित समय हैं, वास्तविक यात्रा अवधि रूट, ट्रैफिक और कनेक्टिंग सड़कों पर निर्भर करेगी.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ाव
प्रस्तावित कॉरिडोर की एक अहम खासियत इसका दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ाव बताया जा रहा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार दौसा के लालसोट क्षेत्र के आसपास कनेक्टिविटी मिलने से दिल्ली-NCR से आने वाले वाहनों को राजस्थान के कई हिस्सों तक बेहतर हाई-स्पीड रोड नेटवर्क मिल सकता है.
इस कनेक्टिविटी का फायदा सिर्फ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और व्यापार से जुड़े वाहनों को भी मिलने की संभावना है.
किन जिलों को फायदा मिलने की उम्मीद?
नए प्रस्तावित अलाइनमेंट की रिपोर्टों में जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को जोड़ने की बात सामने आई है. इससे राजस्थान के मध्य और पूर्वी हिस्सों के बीच सड़क संपर्क मजबूत हो सकता है.
इसके अलावा पुराने 342 किलोमीटर वाले प्रस्ताव में ब्यावर, गुलाबपुरा, केकड़ी, टोडारायसिंह, उनियारा, टोंक और निवाई सहित कई क्षेत्रों को जोड़ने की योजना बताई गई थी. इसलिए अंतिम रूट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से शहर और गांव सीधे कॉरिडोर से जुड़ेंगे.
एक्सप्रेसवे पर कितनी रफ्तार से वाहन चलेंगे?
हालिया प्रस्ताव से जुड़ी रिपोर्ट में एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर अधिकतम करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा कई पुल, रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाईओवर, इंटरचेंज और अंडरपास बनाने की योजना भी बताई गई है.
हालांकि, इन सुविधाओं की अंतिम संख्या और डिजाइन में बदलाव संभव है, क्योंकि परियोजना की विस्तृत योजना और मंजूरी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
कब शुरू होगा निर्माण?
यही इस परियोजना से जुड़ा सबसे अहम सवाल है. मार्च 2025 में सामने आई जानकारी में सर्वे के लिए 18 महीने की अवधि और उसके बाद निर्माण शुरू होने की बात कही गई थी.
लेकिन सितंबर 2026 की हालिया रिपोर्ट में परियोजना को अभी DPR, सर्वे और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे चरणों में बताया गया है. भूमि अधिग्रहण के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. इसलिए फिलहाल निर्माण पूरा होने या आम लोगों के लिए एक्सप्रेसवे खुलने की निश्चित तारीख बताना उचित नहीं होगा.
राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य मौजूदा व्यस्त सड़कों के समानांतर तेज और नियंत्रित यातायात के लिए नया कॉरिडोर उपलब्ध कराना है. ब्यावर-भरतपुर परियोजना पूरी होने पर राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क दूरी और यात्रा समय कम करने में मदद मिल सकती है.
बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन, कृषि उत्पादों की ढुलाई, औद्योगिक गतिविधियों और व्यापारिक परिवहन को भी फायदा मिलने की संभावना है. खासतौर पर दिल्ली-NCR और राजस्थान के बीच तेज कनेक्टिविटी बनने से माल और यात्रियों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकता है.
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ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राजस्थान की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. पुराने प्रस्ताव में इसे करीब 342 किलोमीटर का कॉरिडोर बताया गया था, जबकि सितंबर 2026 की हालिया जानकारी में करीब 277 किलोमीटर के नए प्रस्तावित अलाइनमेंट की चर्चा है. इसलिए अंतिम लंबाई और गांवों की सूची को आधिकारिक DPR और मंजूर अलाइनमेंट के बाद ही निश्चित माना जाना चाहिए.
परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली-NCR, जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. फिलहाल परियोजना को लेकर सर्वे, DPR, पर्यावरणीय प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण जैसे चरण महत्वपूर्ण हैं.


