Gwalior Telecom Manufacturing Zone: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एशिया का पहला समर्पित Telecom Manufacturing Zone (TMZ) विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को प्रस्तावित TMZ के लिए चिन्हित जगह का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि करीब 24 कंपनियों ने इस जोन में अपनी यूनिट लगाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रस्तावित परियोजना में करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश से 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
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एक यूनिट नहीं, पूरा Telecom Manufacturing Ecosystem
ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक यह परियोजना सिर्फ एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने तक सीमित नहीं होगी. इसका लक्ष्य ग्वालियर में 24 से 25 टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है. इन इकाइयों में टेलीकॉम उपकरणों के साथ-साथ अलग-अलग कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा. इससे ग्वालियर को देश के उभरते टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
170 एकड़ जमीन चिन्हित
प्रस्तावित TMZ के लिए करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है. इसमें SADA में लगभग 90 एकड़ से ज्यादा और IT Park में करीब 70 एकड़ जमीन शामिल है. सिंधिया ने बताया कि निवेशकों की दिलचस्पी इतनी ज्यादा है कि अब तक प्राप्त आवेदन उपलब्ध जमीन से ज्यादा हैं. ऐसे में पहले चरण के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन की पहचान की जाएगी और जरूरत के मुताबिक भूमि आवंटन बढ़ाया जाएगा.
दिल्ली और मुंबई रोड शो से आया ₹5,500 करोड़ का निवेश प्रस्ताव
TMZ को लेकर जुलाई 2026 में केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच MoU हुआ था. इसके बाद अगस्त में दिल्ली और मुंबई में निवेशक रोड शो आयोजित किए गए. दिल्ली रोड शो में करीब 3,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनसे करीब 14,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई.
वहीं 4 अगस्त को मुंबई में आयोजित रोड शो में करीब 2,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे. इससे लगभग 4,000 रोजगार के अवसर जुड़ने की उम्मीद है. सिंधिया ने स्पष्ट किया कि ये केवल मौखिक घोषणाएं नहीं हैं. निवेश में रुचि दिखाने वाली कंपनियों को भूमि आवंटन के समय आवेदन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा गया था. इसके बाद 24 कंपनियों ने TMZ में अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है.
कंपनियों को मिलेंगे कई तरह के इंसेंटिव
मध्य प्रदेश सरकार ने टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है. इसमें जमीन की लीज, बिजली, रोजगार और उत्पादन से जुड़े इंसेंटिव शामिल हैं. इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है. केंद्र के दूरसंचार विभाग ने करीब 500 करोड़ रुपये के Common Testing Lab पैकेज का भी प्रस्ताव दिया है. इससे टेलीकॉम कंपनियों को उत्पादों की टेस्टिंग के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
ग्वालियर को क्यों चुना गया?
सिंधिया ने TMZ के लिए ग्वालियर की कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव संसाधन को अहम ताकत बताया. ग्वालियर को दिल्ली और उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों से जोड़ने के लिए करीब 120 किलोमीटर लंबे आगरा-ग्वालियर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भी विकास किया जा रहा है. इसके अलावा ग्वालियर प्रमुख रेलवे रूट से जुड़ा हुआ है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में माल और मानव संसाधन की आवाजाही आसान हो सकती है.
एयर कनेक्टिविटी भी मजबूत
ग्वालियर एयरपोर्ट को करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है. बताया गया कि इसका निर्माण रिकॉर्ड करीब 16 महीने में पूरा किया गया. एयर कनेक्टिविटी के जरिए ग्वालियर को दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से जोड़ने में मदद मिली है.
हर साल 25 हजार इंजीनियरिंग छात्र होंगे तैयार
ग्वालियर में करीब 25,000 इंजीनियरिंग छात्र हर साल ग्रेजुएट होते हैं. इससे प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए तकनीकी और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता में मदद मिलने की उम्मीद है. TMZ को टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के छह प्रमुख वर्टिकल को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना है.
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बेंगलुरु में अगला रोड शो
सिंधिया ने बताया कि ग्वालियर के दो दिवसीय दौरे के बाद वह 22 सितंबर को बेंगलुरु जाएंगे. वहां टेलीकॉम सेक्टर के निवेशकों के साथ रोड शो आयोजित किया जाएगा. ग्वालियर में प्रस्तावित एसिया के पहले Telecom Manufacturing Zone को शहर के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार का लक्ष्य यहां निवेश, विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देने के साथ एक संपूर्ण टेलीकॉम इंडस्ट्री इकोसिस्टम तैयार करना है.


