Gorakhpur Siliguri Expressway: बिहार से असम तक सड़क कनेक्टिविटी को लेकर गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को एक अहम परियोजना माना जा रहा है. यह 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार को सिलीगुड़ी से जोड़ेगा. इसके जरिए आगे पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की उम्मीद है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर को अक्सर ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है.
इस एक्सप्रेसवे से मिथिला क्षेत्र के लोगों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर मधुबनी और आसपास के इलाकों से सिलीगुड़ी की यात्रा आसान हो सकती है. आगे सिलीगुड़ी से असम की ओर बढ़ने पर मां कामाख्या मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी सुगम होगा.
मधुबनी से कामाख्या तक करीब 10 घंटे का अनुमान
उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और आगे की कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद मधुबनी से सिलीगुड़ी तक करीब 4 घंटे का सफर हो सकता है. वहीं सिलीगुड़ी से मां कामाख्या मंदिर तक सड़क मार्ग से करीब 6 से 6.5 घंटे लगने का अनुमान है. इस हिसाब से मधुबनी से कामाख्या मंदिर तक कुल यात्रा का समय करीब 10 से 10.5 घंटे हो सकता है. हालांकि, वास्तविक यात्रा समय एक्सप्रेसवे के पूरा होने, अंतिम रूट, ट्रैफिक और सड़क की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेगा.
मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और सीतामढ़ी से जुड़े धार्मिक महत्व को देखते हुए यह कनेक्टिविटी धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है. इससे बिहार के मिथिला क्षेत्र से पूर्वोत्तर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक सड़क संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है.
120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाना प्रस्तावित है. इस पर वाहनों के 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने की बात कही जा रही है. एक्सप्रेसवे पर वाहनों की एंट्री और एग्जिट के लिए निर्धारित स्थान होंगे. इससे मुख्य सड़क पर अनियंत्रित तरीके से वाहनों के प्रवेश और निकास को कम करने में मदद मिल सकती है.
गांव-कस्बों में भी दिख सकता है असर
एक्सप्रेसवे के आसपास के गांवों और कस्बों में भी इसके निर्माण का आर्थिक असर देखने को मिल सकता है. सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और अन्य छोटे कारोबार विकसित होने की संभावना है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. हालांकि, इन संभावित आर्थिक लाभों का वास्तविक असर एक्सप्रेसवे के निर्माण, आसपास के क्षेत्रों के विकास और यातायात की मात्रा पर निर्भर करेगा. कुल मिलाकर, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार को सिलीगुड़ी और आगे पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क कड़ी बन सकता है. इसके पूरा होने के बाद मिथिला क्षेत्र से असम तक सड़क यात्रा पहले के मुकाबले अधिक सुगम होने की उम्मीद है.
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