Flydubai Flight FZ1073: मौत सामने थी, शरीर पर गंभीर चोटें थीं, लेकिन कैप्टन स्मित मच्छर ने हिम्मत नहीं हारी. विमान में कथित हाईजैक की कोशिश के दौरान उनकी बहादुरी ने सैकड़ों जिंदगियों को खतरे से बचाने में अहम भूमिका निभाई. अब इजरायल ने उनकी वीरता को सलाम करते हुए उन्हें राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार देने का ऐलान किया है.
एक भारतीय पायलट की बहादुरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है. इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार देने की घोषणा की है. यह सम्मान उन्हें फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कथित हाईजैक और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने में उनकी भूमिका के लिए दिया जाएगा. गुरुवार को राष्ट्रपति हर्जोग ने छह इजरायली नागरिकों को भी नागरिक वीरता पदक प्रदान किया, जिन्होंने विमान में सवार हमलावर को काबू करने में मदद की थी. इस दौरान उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी और पेशेवर सूझबूझ की सराहना की.
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राष्ट्रपति बोले- स्वस्थ होने पर खुद सम्मानित करना मेरे लिए गर्व की बात होगी
सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने कैप्टन स्मित मच्छर के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट के साहस, बहादुरी और पेशेवर कुशलता ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की. हर्जोग ने कहा कि कैप्टन मच्छर के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें इजरायल की जनता की ओर से राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार प्रदान करना उनके लिए सम्मान और गर्व की बात होगी. यह घोषणा उस भारतीय पायलट के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक है, जिसने खुद गंभीर चोटें झेलने के बावजूद विमान में सवार लोगों की सुरक्षा के लिए हिम्मत दिखाई.
कॉकपिट में हमला, फिर भी नहीं मानी हार
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विमान के ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने कॉकपिट के भीतर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया. आरोप है कि हमलावर विमान को गिराने की कोशिश कर रहा था.
हमले में कैप्टन मच्छर गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद विमान में मौजूद कुछ यात्री और ड्यूटी से बाहर के क्रू सदस्य अंदर पहुंचे. उन्होंने मिलकर हमलावर को काबू किया. इस दौरान विमान अचानक नीचे की ओर तेजी से उतरने लगा. बताया गया कि करीब दो मिनट में विमान लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया. इसके बाद हाईजैक से जुड़ा आपातकालीन संकेत भेजा गया और विमान का मार्ग बदलकर सऊदी अरब के तबुक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई. विमान में सवार सभी 180 लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने की जानकारी सामने आई. ऐसे मुश्किल हालात में कैप्टन मच्छर की सूझबूझ और साहस ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया.
छह इजरायली नागरिकों को भी मिला सम्मान
इजरायल ने इस घटना के दौरान साहस दिखाने वाले छह नागरिकों को भी सम्मानित किया. इनमें ताली मानेस, ज्विका मानेस, यानिव हयून, डॉ. शोता मुसायेव, असफ राजुआन और ओर पारदिलॉव शामिल हैं. इन नागरिकों ने कथित हमले के दौरान हमलावर को रोकने और विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा में मदद की थी. इजरायल के राष्ट्रपति ने उनके साहस को भी सम्मानित किया.
अबू धाबी के अस्पताल में चल रहा इलाज
कैप्टन स्मित मच्छर फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित अस्पताल में उपचार करा रहे हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को बताया कि कैप्टन मच्छर इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उनकी सेहत में सुधार हो रहा है. उन्होंने कहा कि यूएई में भारतीय दूतावास लगातार कैप्टन, उनके परिवार, स्थानीय अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन के संपर्क में है.
इससे पहले भारतीय दूतावास ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर अपडेट साझा किया था. दूतावास के मुताबिक, कैप्टन मच्छर की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं. दूतावास ने उनके परिवार और चिकित्सकों के साथ संपर्क बनाए रखने तथा हर संभव सहायता देने की बात भी कही.
बहादुरी की कहानी, जिसने देश का सिर गर्व से ऊंचा किया
कैप्टन स्मित मच्छर के लिए यह समय कठिन है. एक ओर वह गंभीर चोटों से उबर रहे हैं, दूसरी ओर उनकी बहादुरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है. इजरायल के राष्ट्रपति की घोषणा ने यह संदेश दिया है कि संकट के समय दिखाई गई हिम्मत और दूसरों की जान बचाने का प्रयास सीमाओं से परे सम्मान पाता है. अब सभी की निगाहें कैप्टन मच्छर के जल्द स्वस्थ होने पर टिकी हैं, ताकि वह अपने साहस के लिए मिलने वाला यह सम्मान स्वयं ग्रहण कर सकें.
एक पायलट का कर्तव्य केवल विमान उड़ाना नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जिम्मेदारी निभाना भी है. कैप्टन स्मित मच्छर की कहानी इसी साहस, कर्तव्य और इंसानी जज्बे की मिसाल बनकर सामने आई है.
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