चंडीगढ़: चंडीगढ़ में जमीन की कमी के बीच प्रशासन शहर के भविष्य के विस्तार के लिए एक बड़ी योजना पर विचार कर रहा है. आईटी पार्क में उपलब्ध 123 एकड़ से अधिक जमीन को विकास का ‘लॉन्च पैड’ बनाने का प्रस्ताव है. योजना के मुताबिक इस जमीन के विकास या नीलामी से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल चंडीगढ़ के बाहरी हिस्सों में स्थित 22 गांवों की करीब 1,750 एकड़ जमीन के अधिग्रहण में किया जा सकता है. यानी मौजूदा जमीन से कमाई होगी और उसी रकम को नई जमीन हासिल करने और उसे विकसित करने में लगाया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह आगे बढ़ाना है कि चंडीगढ़ के विस्तार के लिए अतिरिक्त बजटीय बोझ कम से कम पड़े.
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1,750 एकड़ जमीन पर करीब 14 हजार करोड़ का अनुमान
प्रस्ताव के अनुसार 22 गांवों में करीब 1,750 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अनुमानित लागत 14,000 करोड़ रुपये आंकी गई है. वहीं, मौजूदा कलेक्टर दरों के आधार पर इस जमीन की कीमत करीब 10,500 करोड़ रुपये बताई गई है. प्रशासन के विचाराधीन अनुमान के मुताबिक भविष्य में इस जमीन के विकास और नीलामी से करीब 78,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व हासिल हो सकता है. सभी खर्चों को घटाने के बाद करीब 66,000 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, ये आंकड़े फिलहाल प्रस्तावित योजना के अनुमान हैं और अंतिम निर्णय के बाद इनमें बदलाव हो सकता है.
2,585 एकड़ जमीन में हरियाली को भी जगह
प्रस्तावित योजना में सिर्फ कमाई और निर्माण पर जोर नहीं है, बल्कि शहर की हरियाली को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है. कुल 2,585 एकड़ जमीन के संभावित इस्तेमाल का खाका तैयार किया गया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा यानी 835 एकड़ जमीन ग्रीन एरिया के लिए रखने का प्रस्ताव है. इसके अलावा 555 एकड़ संस्थागत विकास और 480 एकड़ आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रस्तावित है. करीब 750 एकड़ जमीन को बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं के विकास के बाद नीलामी के लिए उपलब्ध रखने की योजना है.
ऐसे बंट सकती है 2,585 एकड़ जमीन
835 एकड़: ग्रीन एरिया
555 एकड़: संस्थागत विकास
480 एकड़: आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग
750 एकड़: बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं के विकास के बाद नीलामी के लिए
पार्श्वनाथ डेवलपर्स से विवाद के बाद वापस मिली थी जमीन
आईटी पार्क की यह जमीन चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के लिए काफी महत्वपूर्ण रही है. यह जमीन पार्श्वनाथ डेवलपर्स के साथ लंबे कानूनी विवाद के बाद वापस हासिल की गई थी. वर्ष 2015 में करीब 123 एकड़ जमीन बोर्ड के कब्जे में वापस आई थी. इसके बाद इस जमीन के विकास को लेकर कई योजनाओं पर विचार हुआ. पहले यहां आवासीय परियोजना के साथ पांच सितारा होटल और अन्य सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया था.
जमीन की कमी दूर करने पर जोर
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा प्रस्ताव का उद्देश्य चंडीगढ़ के बाहरी क्षेत्रों का विकास बिना अतिरिक्त बजटीय बोझ बढ़ाए करना है. योजना के तहत पहले उपलब्ध जमीन से राजस्व जुटाया जाएगा. इसके बाद उस रकम से नई जमीन का अधिग्रहण कर उसे सुनियोजित तरीके से विकसित करने की कोशिश होगी. चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सदस्य शक्ति प्रकाश देवशाली ने कहा कि शहर में जमीन की कमी है. उनके मुताबिक आईटी पार्क की जमीन को विकसित कर उससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल गांवों की जमीन के अधिग्रहण और विकास में किया जा सकता है. इससे शहर की जरूरतें पूरी करने के साथ किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.
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