Delhi Dehradun Greenfield Highway: दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के 14 अप्रैल को उद्घाटन के साथ सहारनपुर सीधे भारतमाला परियोजना से जुड़ जाएगा. बड़गांव इंटरचेंज के माध्यम से 50 से अधिक गांवों की करीब दो लाख आबादी को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सड़क कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास तेज होने की उम्मीद है.
किसानों की फसल से मरीजों की जिंदगी तक
इस हाईवे के बनने से कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा. सब्जी किसानों को अपनी फसलें जैसे बैंगन और खीरा दिल्ली और देहरादून की मंडियों तक जल्दी पहुंचाने का मौका मिलेगा. पहले जहां दिल्ली पहुंचने में लगभग पांच घंटे लगते थे, अब यह दूरी ढाई घंटे में तय हो सकेगी, जिससे किसानों को बेहतर दाम और ताजी उपज का लाभ मिलेगा.
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स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से यह हाईवे एक जीवन रक्षक साबित होगा. देवबंद, नानौता और बड़गांव जैसे क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को अब दिल्ली या देहरादून के बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में पहले के मुकाबले आधा समय लगेगा. इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाएगी.
हर जरूरत का सहारा बनेगा ग्रीनफील्ड हाईवे
शिक्षा क्षेत्र में भी इस हाईवे का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. देहरादून और दिल्ली जैसे शिक्षा हब से जुड़ने पर छात्रों को आवागमन में आसानी होगी. उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले विद्यार्थियों का समय और खर्च दोनों कम होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी बेहतर अवसर मिल पाएंगे. व्यापार और कारोबार को इस हाईवे से नई गति मिलेगी.
स्थानीय व्यापारी अब दिल्ली से सामान मंगाने के लिए पहले जैसी लंबी योजना नहीं बनानी पड़ेगी. ऑर्डर देने के कुछ ही घंटों में माल उपलब्ध हो जाएगा, जिससे व्यापार की गति तेज होगी और स्थानीय बाजारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में
हाईवे पर आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं. हर किलोमीटर पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. जैनपुर के पास टोल प्लाजा तैयार है, जबकि बड़गांव के पास रेस्ट एरिया में खानपान, शौचालय और पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी बाकी हैं. सर्विस रोड का कार्य और सीसीटीवी केबल बिछाने का काम जारी है. वहीं एक विद्युत ट्रांसफार्मर अभी भी हटाया नहीं गया है, जिससे थोड़ी बाधा बनी हुई है. रेस्ट एरिया का निर्माण भी अभी अधूरा है जिसे जल्द पूरा किया जाएगा.
इस हाईवे का निर्माण आसान नहीं था, क्योंकि इसके लिए 28 गांवों की लगभग एक हजार बीघा जमीन का अधिग्रहण किया गया. किसानों ने मुआवजा और सुविधाओं को लेकर कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन अब परियोजना के पूर्ण होने पर उन्हें इसके लाभ दिखाई देने लगे हैं, जिससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं.


