Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार अब सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि सपनों में भी दौड़ रही है. 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने जा रहा है, और इसी के साथ एक और मेगा प्रोजेक्ट गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे ने उम्मीदों का नया आसमान खड़ा कर दिया है.जो विकास और कनेक्टिविटी के नए आयाम स्थापित करेगा.
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे की लंबाई
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे लगभग 700–750 किलोमीटर लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तार किया जा सकेगा. यह एक्सप्रेसवे 22 जिलों और 37 तहसीलों को जोड़ेगा, जिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन आसान और तेज हो जाएगा तथा आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी.
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NHAI इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है, जबकि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किया गया है. गोरखपुर-शामली परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है, जिससे 2026-27 तक निर्माण शुरू होने की उम्मीद है.
12–14 घंटे का सफर 8–9 घंटे में
यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर जैसे जिलों से लेकर पूर्वांचल के बहराइच, गोंडा, अयोध्या और गोरखपुर तक फैलेगा. यह हरियाणा सीमा से शुरू होकर नेपाल बॉर्डर के समानांतर चलेगा, जिससे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और व्यापारिक संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे को गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है, जिससे पूर्वोत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर के बीच दूरी और समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. वर्तमान में 12–14 घंटे का सफर घटकर लगभग 8–9 घंटे रह जाएगा, जिससे लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और व्यापारिक आवागमन को बड़ा लाभ मिलेगा.
यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जो तराई और पिछड़े जिलों जैसे बहराइच, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर को जोड़ते हुए विकास की मुख्यधारा में लाएगा. नेपाल बॉर्डर के पास स्थित होने से यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नया केंद्र भी बन सकता है और सीमावर्ती क्षेत्रों का आर्थिक सशक्तिकरण करेगा. एक्सप्रेसवे के किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), औद्योगिक क्लस्टर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और चीनी मिलों के विकास की योजना है. इससे स्थानीय किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा, साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
इस परियोजना को अन्य बड़े कॉरिडोर जैसे दिल्ली-देहरादून, अंबाला-शामली, गोरखपुर लिंक और दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. साथ ही इसमें इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाया जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और रियल टाइम मॉनिटरिंग बेहतर होगी, और दुर्घटनाओं में कमी आएगी.


