Gorakhpur Siliguri Expressway: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक का सफर आने वाले समय में काफी आसान और तेज होने वाला है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है. करीब 520 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल और आगे पूर्वोत्तर भारत से जोड़ेगा.
गोरखपुर के जगदीशपुर से शुरू होने वाला यह एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना के दूसरे चरण के तहत बनाया जा रहा है. इसके पूरा होने के बाद न सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा का समय घटेगा, बल्कि यूपी, बिहार और पूर्वोत्तर के बीच कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
15 घंटे का सफर सिमटकर 6-8 घंटे का होगा
अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 15 घंटे तक लग जाते हैं. एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही सफर लगभग 6 से 8 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है. छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित है. परियोजना पर करीब 32,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यानी जहां अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचना लंबी और थकाऊ यात्रा है, वहीं एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह सफर काफी तेज और आरामदायक हो सकता है.
यूपी से बंगाल तक इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
गोरखपुर से निकलने के बाद एक्सप्रेसवे कुशीनगर होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा. इसके बाद पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर यह पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा. इसके बाद एक्सप्रेसवे उत्तर दिनाजपुर और दार्जिलिंग होते हुए सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा. इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि मिथिलांचल और सीमांचल के कई इलाके सीधे एक बड़े राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे.
रास्ते में आ रही 132 KV की चार लाइनें
एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई हैं. परियोजना के रास्ते में 132 केवी क्षमता की चार पारेषण लाइनें आ रही हैं. इनमें एक लाइन गोरखपुर और तीन लाइन कुशीनगर जिले में स्थित हैं. इन ट्रांसमिशन लाइनों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि एक्सप्रेसवे का निर्माण निर्धारित तरीके से आगे बढ़ सके.
सिलीगुड़ी क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
सिलीगुड़ी सिर्फ पश्चिम बंगाल का एक शहर नहीं है. देश की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से इसका महत्व बेहद ज्यादा है. सिलीगुड़ी के पास मौजूद संकरी जमीन की पट्टी को आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है. यही गलियारा भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है. इसलिए सिलीगुड़ी तक बेहतर सड़क संपर्क का मतलब सिर्फ यात्रियों के लिए आसान सफर नहीं है, बल्कि देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी है.
यूपी से नॉर्थ ईस्ट तक बदलेगी कनेक्टिविटी
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद उत्तर भारत से पूर्वोत्तर भारत तक सड़क संपर्क और मजबूत होगा. माल ढुलाई में समय कम हो सकता है, व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है और रास्ते में आने वाले शहरों और जिलों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं. गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक बनने वाली यह सड़क सिर्फ दो शहरों को जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे नहीं होगी, बल्कि यूपी, बिहार, बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी की एक नई कड़ी बन सकती है.
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