भारत के टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन स्थापित किया जाएगा. इस परियोजना के लिए आज नई दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे.
समझौते के बाद परियोजना के संचालन के लिए एक स्पेशल पर्पज़ कंपनी (SPC) का गठन किया जाएगा, जिसके साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक कार्य शुरू हो जाएगा.
350 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन
सरकार के अनुसार, यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन करीब 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा.
यहां निम्नलिखित उत्पादों का निर्माण किया जाएगा:
- मोबाइल फोन
- टेलीकॉम उपकरण
- ऑप्टिकल फाइबर
- सेमीकंडक्टर
- 5G और 6G तकनीक से जुड़े उत्पाद
इस परियोजना का उद्देश्य भारत में आधुनिक टेलीकॉम उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर की विनिर्माण क्षमता विकसित करना है.
पहले चरण के लिए ₹493 करोड़ की मंजूरी
परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने ₹493 करोड़ की मंजूरी दी है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा रही है.
सरकार का कहना है कि इससे राज्य में उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के विकास को नई दिशा मिलेगी.
₹12,000 से ₹15,000 करोड़ निवेश की संभावना
आने वाले वर्षों में इस परियोजना में ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ तक के निवेश की संभावना जताई गई है.
सरकार के अनुसार, देश की कई प्रमुख टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां इस परियोजना में निवेश करेंगी, जिससे ग्वालियर एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है.
5,000 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद
इस परियोजना से करीब 5,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है.
इसके अलावा निर्माण, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों में भी अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है.
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आत्मनिर्भर टेलीकॉम विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से देश में टेलीकॉम उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और मध्य प्रदेश को टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद मिलेगी.


