Indore Hyderabad Expressway: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सीधे जोड़ने वाले इंदौर-हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम तेजी से चल रहा है. करीब 954 किलोमीटर की मौजूदा दूरी को घटाकर लगभग 783 किलोमीटर करने वाले इस कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच सफर में करीब 171 किलोमीटर की कमी आएगी. वहीं, यात्रा का समय 16 घंटे से घटकर करीब 7 घंटे होने का दावा किया जा रहा है. यह ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड सड़क परियोजना मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी. कॉरिडोर के बनने से लंबी दूरी के ट्रैफिक को शहरों से बाहर तेज रफ्तार से गुजरने में मदद मिलेगी और औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलेगा.
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4 लेन का आर्थिक कॉरिडोर
इंदौर-हैदराबाद कॉरिडोर को NHAI की भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है. यह करीब चार लेन वाला सेमी-एक्सेस कंट्रोल्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर है, जिसका उद्देश्य मध्य भारत को दक्षिण भारत से तेज और सुरक्षित सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ना है. परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के इंदौर, खंडवा, खरगोन और बुरहानपुर से होते हुए महाराष्ट्र के अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ तथा तेलंगाना के कामारेड्डी, मेडक, संगारेड्डी और हैदराबाद जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा.
तीन राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा
कॉरिडोर के पूरा होने से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को बेहतर परिवहन नेटवर्क मिलने की उम्मीद है. इससे माल ढुलाई का समय और लागत कम हो सकती है. साथ ही ईंधन की बचत और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है. यह कॉरिडोर कई औद्योगिक क्षेत्रों, SEZ, फार्मा और टेक्सटाइल क्लस्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब और मेगा फूड पार्कों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
रास्ते में बन रहीं 3 अहम सुरंगें
परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मध्य प्रदेश में इंदौर के तेजाजी नगर से खरगोन जिले के बलवाड़ा के बीच का करीब 33.40 किलोमीटर का सेक्शन बताया जा रहा है. यह मार्ग दुर्गम पहाड़ी इलाके से गुजरता है, इसलिए यहां सुरंगों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. इस हिस्से में करीब 575 मीटर लंबी भेरूघाट सुरंग, 550 मीटर लंबी चोरल घाट सुरंग और 480 मीटर लंबी बाईग्राम सुरंग शामिल हैं. इनका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र में सड़क को सुरक्षित और सुगम बनाना है.
पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
इंदौर और हैदराबाद के बीच बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का फायदा पर्यटन क्षेत्र को भी मिल सकता है. कॉरिडोर से पातालपानी, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, चारमीनार, गोलकोंडा किला और रामोजी फिल्म सिटी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
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2026 में शुरू होने की उम्मीद
इस परियोजना को पहले 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन सुरंग और वायडक्ट जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों के कारण इसमें देरी हुई है. अब इसके 2026 में शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है. परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इंदौर-हैदराबाद कॉरिडोर के पूरा होने के बाद मध्य भारत और दक्षिण भारत के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा. इससे न केवल यात्रियों का सफर तेज होगा, बल्कि माल परिवहन, उद्योग, कृषि और पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.


