हाथरस: यमुना प्राधिकरण ने न्यू हाथरस औद्योगिक शहर को लेकर बड़ा फैसला लिया है. पहले करीब 4 हजार हेक्टेयर में नया औद्योगिक शहर बसाने की योजना थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर करीब 11 हजार हेक्टेयर करने की तैयारी है. प्राधिकरण का मानना है कि बड़े क्षेत्र में शहर विकसित होने से उद्योग, आवास और दूसरी शहरी सुविधाओं के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध हो सकेगी.
न्यू हाथरस को यमुना प्राधिकरण के फेज-2 में शामिल किया गया है. इसी फेज में अलीगढ़ का टप्पल-बाजना, मथुरा का राया और आगरा का न्यू आगरा अर्बन सेंटर भी शामिल हैं. इन शहरों के मास्टर प्लान पर पहले ही काम किया जा चुका है.
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नए सिरे से होगा सर्वे
हाथरस में 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक शहर बसाने के लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट को मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. कंपनी ने सर्वे के बाद हाथरस शहर के आसपास दो से तीन संभावित स्थानों का सुझाव भी दिया था. हालांकि, यमुना प्राधिकरण 4 हजार हेक्टेयर में शहर के लिए जरूरी सभी सुविधाएं और बुनियादी ढांचा विकसित करने को लेकर संतुष्ट नहीं है. इसी वजह से अब क्षेत्रफल बढ़ाकर 11 हजार हेक्टेयर करने का निर्णय लिया गया है. कंपनी को नए क्षेत्र के हिसाब से दोबारा सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
कनेक्टिविटी बनी बड़ी वजह
यमुना प्राधिकरण के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक, 4 हजार हेक्टेयर में नए औद्योगिक शहर के लिए सभी जरूरी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास करना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा प्रस्तावित क्षेत्रों की एक्सप्रेसवे से दूरी करीब 50 किलोमीटर तक है, ऐसे में कनेक्टिविटी भी बड़ी चुनौती है.क्षेत्रफल बढ़ाने से शहर को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की संभावना बनेगी. इससे उद्योगों के साथ-साथ आवासीय और अन्य जरूरी सेक्टर के लिए भी जमीन उपलब्ध कराई जा सकेगी.
रेलवे कनेक्टिविटी का भी मिलेगा फायदा
न्यू हाथरस के लिए रेलवे कनेक्टिविटी को भी अहम माना जा रहा है. यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के पास से रेलवे लाइन गुजरती है. ऐसे में रेलवे लाइन के आसपास नए शहर की योजना तैयार करने पर औद्योगिक गतिविधियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है. इससे भविष्य में उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है.
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में होगी बैठक
न्यू हाथरस के मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पहले स्थानीय प्रशासन से भी सुझाव लिए जाएंगे. इसके लिए अलीगढ़ मंडल के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बैठक प्रस्तावित है. बैठक में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होंगे.
बैठक में यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र, मौजूदा बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और औद्योगिक संभावनाओं को लेकर अधिकारियों से सुझाव लिए जाएंगे. इसके बाद नए सिरे से तैयार होने वाले मास्टर प्लान को आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जाएगा.
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