जब संसार शोर बन जाए,
और मन प्रश्नों से भर जाए,
जब भीतर का दीपक कांपने लगे,
तब एक नाम है जो मौन में भी
आवाज़ बनकर उतर आते हैं-
प्रेमानंद महाराज.
आप संत नहीं,
आप अनुभूति हैं.
शब्द नहीं,
शब्दों के पीछे छुपा भाव हैं.
आपने हमें ईश्वर नहीं बताया,
आपने हमें ईश्वर से मिलना सिखाया.
कभी वृंदावन की गलियों में
नंगे पांव चलते हुए देखा,
तो लगा- यह देह नहीं,
यह तो करुणा का चलता हुआ रूप है.
भगवान भी मां के बिना अधूरा है…..
आपके वस्त्र साधारण हैं,
पर आपकी दृष्टि में
ब्रह्मांड समाया है.
आपकी वाणी धीमी है,
पर उसका कंपन
सीधे आत्मा को छू जाता है.
आप कहते हैं- ‘भगवान बाहर नहीं,
भगवान तुम्हारे भीतर हैं.’
और उस एक वाक्य में
हमारी उम्र भर की
खोज समाप्त हो जाती है.
जब दुनिया ने हमें
योग्यता में बांटा,
आपने हमें प्रेम में जोड़ा.
जब समाज ने हमें
ऊंच-नीच सिखाई,
आपने कहा-
‘सब राधा के हैं,
सब कृष्ण के हैं.’
आपकी आंखों में
क्रोध नहीं, निर्णय नहीं,
बस एक प्रश्न है-
‘क्या तुमने आज
किसी को बिना स्वार्थ चाहा?’
आपकी मुस्कान
कोई उपदेश नहीं देती,
वह बस हमारे भीतर जमी
कठोरता को पिघला देती है.
कभी-कभी लगता है-
आप बोलते नहीं,
आप प्रार्थना करते हैं,
और हम सुनते नहीं,
हम भीतर से रो पड़ते हैं.
आपकी साधना दिखावे की नहीं,
आपका मौन भी हमें बहुत कुछ सिखा देता है.
आपने कभी मंच नहीं मांगा,
फिर भी लाखों दिल
आपके चरणों में बैठे हैं.
आपने बताया- भक्ति का अर्थ
भगवान से कुछ मांगना नहीं,
बल्कि अपने अहंकार को
उनके चरणों में रख देना है.
आपके शब्दों में शास्त्र हैं,
पर जटिल नहीं.
आपके प्रवचन में
ज्ञान है, पर बोझ नहीं.
आपने कहा- ‘अगर रोना आए,
तो भगवान के सामने रोना.’
और उस दिन हमने जाना-
आंसू भी पूजा बन सकते हैं.
आपने प्रेम को कमज़ोरी नहीं,
सबसे बड़ी शक्ति बताया.
आपने सिखाया- जो झुक सकता है,
वही उठ सकता है.
आज जब दुनिया तेज़ हो चुकी है,
आप ठहराव हैं.
आज जब हर कोई दिखना चाहता है,
आप होने का अर्थ हैं.
आपने हमें
धर्म ही नहीं सिखाया,
आपने हमें
मानव होना सिखाया.
मां की आराधना से मिटे, जीवन का हर अंधकार…
जब हम गिरते हैं,
आप डांटते नहीं,
आप कहते हैं- ‘फिर उठो,
भगवान थकते नहीं तुमसे.’
आपकी भक्ति में डर नहीं,
आपके प्रेम में दूरी नहीं.
आप हमें भगवान से नहीं डराते,
आप हमें भगवान से मिलाते हैं.
कभी-कभी लगता है-
आप संत नहीं,
आप किसी जन्म में
हमारे अपने रहे होंगे.
शायद इसलिए आपकी बातें
इतनी अपनी लगती हैं.
आपकी साधना
किसी गुफा में नहीं,
आपकी साधना
हर टूटे दिल में है.
आपने हमें बताया-
ईश्वर वहां है, जहां प्रेम है.
आज जब हम
जीवन की भीड़ में
खो जाते हैं,
आप एक दीपक बनकर
हमारे भीतर जलते हैं.
प्रेमानंद महाराज, आपका होना
ईश्वर का प्रमाण है.
आपका मौन
सबसे सुंदर प्रवचन है.
आपका प्रेम सबसे शुद्ध ग्रंथ है.
अगर कभी
हम भटक जाएं,
तो बस इतना ही काफी है-
आपका नाम एक बार
मन में उतर जाए.
क्योंकि
जहां प्रेम है,
वहीं आप हैं.
और जहां आप हैं,
वहीं भगवान हैं.


