भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 12 जून 2026 को भारत सरकार की दो दिनांकित प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित करने की घोषणा की है. इस नीलामी के जरिए केंद्र सरकार बाजार से ₹32,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है.
RBI द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026-2027/414 के अनुसार, इस बार दो मौजूदा सरकारी प्रतिभूतियों का पुनः निर्गम किया जाएगा. इनमें 6.36 प्रतिशत GS 2031 और 7.71 प्रतिशत GS 2066 शामिल हैं.
यह नीलामी सरकार के नियमित उधारी कार्यक्रम का हिस्सा है और वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे निवेशकों की मांग, सरकारी उधारी की लागत और बॉन्ड बाजार की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी.
आयुष्मान कार्ड बनवाने का सबसे आसान तरीका, घर बैठे करें आवेदन
किन प्रतिभूतियों की होगी बिक्री?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 6.36 प्रतिशत GS 2031 के जरिए ₹21,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. इस प्रतिभूति की परिपक्वता 16 फरवरी 2031 को होगी.
दूसरी ओर, 7.71 प्रतिशत GS 2066 के तहत ₹11,000 करोड़ जुटाए जाएंगे. यह प्रतिभूति 18 मई 2066 को परिपक्व होगी.
RBI ने कहा है कि भारत सरकार को प्रत्येक प्रतिभूति के मुकाबले ₹2,000 करोड़ तक अतिरिक्त सदस्यता स्वीकार करने का अधिकार भी होगा. यदि मांग अधिक रहती है, तो सरकार घोषित राशि से अधिक धन जुटा सकती है.
सरकार सरकारी बॉन्ड क्यों जारी करती है?
सरकारी प्रतिभूतियां वह माध्यम हैं जिनके जरिए केंद्र सरकार बाजार से धन उधार लेती है. इनसे जुटाई गई राशि का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, आधारभूत ढांचा परियोजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और अन्य सार्वजनिक खर्चों के लिए किया जाता है.
सरकारी बॉन्ड को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इनके पीछे भारत सरकार की गारंटी होती है. इसी वजह से बैंक, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड और अन्य संस्थागत निवेशक इनमें बड़ी मात्रा में निवेश करते हैं.
पुनः निर्गम का क्या मतलब है?
इस नीलामी में शामिल दोनों प्रतिभूतियां पहले से बाजार में मौजूद हैं. सरकार इनका नया संस्करण जारी नहीं कर रही, बल्कि मौजूदा बॉन्ड की अतिरिक्त मात्रा बेच रही है.
वित्तीय बाजार में इसे पुनः निर्गम या री-इश्यू कहा जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे संबंधित प्रतिभूतियों की बाजार में उपलब्धता बढ़ती है और उनमें ट्रेडिंग अधिक आसान हो जाती है. इससे तरलता बेहतर होती है और निवेशकों को खरीद-बिक्री में सुविधा मिलती है.
2031 और 2066 वाले बॉन्ड में क्या अंतर है?
दोनों प्रतिभूतियां अलग-अलग निवेश आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं.
6.36 प्रतिशत GS 2031
यह अपेक्षाकृत कम अवधि वाली प्रतिभूति है. ऐसे बॉन्ड उन निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं जो मध्यम अवधि के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं.
कम अवधि वाले बॉन्ड आमतौर पर ब्याज दरों में बदलाव से कम प्रभावित होते हैं.
7.71 प्रतिशत GS 2066
यह लंबी अवधि का सरकारी बॉन्ड है जिसकी परिपक्वता 2066 में होगी.
ऐसी प्रतिभूतियां विशेष रूप से बीमा कंपनियों, पेंशन फंड और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए उपयोगी होती हैं. हालांकि लंबी अवधि वाले बॉन्ड में ब्याज दरों में बदलाव का असर अधिक दिखाई देता है.
नीलामी की प्रक्रिया कैसे होगी?
RBI के अनुसार यह नीलामी मल्टीपल प्राइस पद्धति से आयोजित की जाएगी.
इस प्रणाली में सफल निवेशकों को वही मूल्य या यील्ड मिलती है जिस पर उनकी बोली स्वीकार की जाती है. इसका अर्थ यह है कि सभी सफल निवेशकों को एक समान मूल्य नहीं मिलेगा.
यह प्रणाली बाजार आधारित मूल्य निर्धारण को बढ़ावा देती है और निवेशकों को वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर बोली लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है.
महत्वपूर्ण तारीखें और समय
गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां 12 जून 2026 को सुबह 10:30 बजे से 11:00 बजे तक जमा की जा सकेंगी.
प्रतिस्पर्धी बोलियां सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक स्वीकार की जाएंगी.
नीलामी का परिणाम उसी दिन घोषित किया जाएगा.
सफल बोलीदाताओं को 15 जून 2026 को भुगतान और सेटलमेंट करना होगा.
आम निवेशकों के लिए क्या अवसर है?
RBI की गैर-प्रतिस्पर्धी बोली सुविधा के तहत खुदरा निवेशक भी सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में हिस्सा ले सकते हैं.
आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक प्रतिभूति की कुल नीलामी राशि का पांच प्रतिशत तक हिस्सा पात्र व्यक्तिगत निवेशकों और संस्थानों के लिए आरक्षित किया जाता है.
खुदरा निवेशक RBI Retail Direct प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बैंक और प्राइमरी डीलर भी यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं.
यह व्यवस्था उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो सरकारी बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं लेकिन पेशेवर संस्थागत निवेशकों की तरह प्रतिस्पर्धी बोली नहीं लगाना चाहते.
व्हेन इश्यूड ट्रेडिंग को मंजूरी
RBI ने घोषणा की है कि दोनों प्रतिभूतियां 9 जून से 12 जून 2026 तक “व्हेन इश्यूड” ट्रेडिंग के लिए पात्र होंगी.
इस व्यवस्था के तहत निवेशक प्रतिभूति के औपचारिक निर्गम से पहले ही उसकी खरीद-बिक्री कर सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बाजार को संभावित मांग और मूल्य का पहले से संकेत मिल जाता है. यह प्रक्रिया बेहतर मूल्य खोज और बाजार दक्षता में मदद करती है.
बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
सरकारी बॉन्ड नीलामी के परिणामों पर पूरा डेट मार्केट नजर रखता है.
यदि नीलामी में मजबूत मांग दिखाई देती है, तो यह संकेत हो सकता है कि निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों को आकर्षक मान रहे हैं. ऐसी स्थिति में यील्ड पर दबाव कम रह सकता है.
वहीं यदि मांग कमजोर रहती है, तो सरकार को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिक यील्ड देनी पड़ सकती है.
बॉन्ड यील्ड का असर केवल सरकारी उधारी तक सीमित नहीं रहता. इसका प्रभाव कॉर्पोरेट बॉन्ड, बैंकिंग क्षेत्र और व्यापक वित्तीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
विदेशी निवेशकों के लिए क्या नियम हैं?
RBI के अनुसार गैर-निवासी निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पूरी तरह सुलभ मार्ग यानी Fully Accessible Route के तहत लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा.
इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है.
हालांकि विदेशी निवेशकों को RBI और अन्य नियामकीय नियमों का पालन करना होगा.
सशक्त युवा, विकसित भारत: 2047 के भारत को आकार देती अमृत पीढ़ी
निवेश से पहले जोखिम समझना भी जरूरी
हालांकि सरकारी प्रतिभूतियों को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इनमें ब्याज दर जोखिम बना रहता है.
यदि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो पहले से खरीदे गए बॉन्ड का बाजार मूल्य घट सकता है. यह जोखिम विशेष रूप से लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों में अधिक होता है.
इसलिए निवेशकों को निवेश का निर्णय लेते समय अपनी वित्तीय जरूरतों, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए.
12 जून को होने वाली यह नीलामी केवल सरकार के लिए धन जुटाने का माध्यम नहीं है. इसके परिणाम यह भी बताएंगे कि मौजूदा आर्थिक माहौल में निवेशकों का भरोसा सरकारी प्रतिभूतियों और भारतीय डेट मार्केट में किस स्तर पर बना हुआ है.
Source: https://www.rbi.org.in , प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026-2027/414


