Ujjain Badnawar Highway: दिल्ली-एनसीआर से मध्य प्रदेश के उज्जैन, इंदौर और देवास जाने वाले लोगों के लिए सड़क कनेक्टिविटी जल्द और बेहतर होने वाली है. NH-752D के उज्जैन-बदनावर-तिमरवानी कॉरिडोर को 4-लेन में अपग्रेड किया जा रहा है. इसके तैयार होने के बाद यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ जाएगा. करीब 3800 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर से उज्जैन तक सड़क यात्रा का समय भी कम होने की उम्मीद है.
उज्जैन-बदनावर-तिमरवानी बनेगा फोरलेन कॉरिडोर
NH-752D के उज्जैन-बदनावर सेक्शन का करीब 70.40 किलोमीटर हिस्सा पहले ही 2-लेन से 4-लेन में अपग्रेड किया जा चुका है. अब बदनावर-तिमरवानी सेक्शन को भी 4-लेन में विकसित किया जा रहा है. काम पूरा होने के बाद उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के तिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी मिल जाएगी. इस मार्ग पर वाहन करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे.
दिल्ली से उज्जैन 9-10 घंटे में पहुंचने की उम्मीद
नए कनेक्शन से दिल्ली-एनसीआर से उज्जैन की यात्रा काफी आसान हो सकती है. मौजूदा पुराने ग्वालियर-शिवपुरी-गुना-ब्यावरा रूट से दिल्ली से उज्जैन पहुंचने में करीब 14 से 16 घंटे लगते हैं. नए फोरलेन और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद यह सफर करीब 9 से 10 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है. दिल्ली से निकलकर वाहन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते राजस्थान होते हुए मध्य प्रदेश में प्रवेश करेंगे. इसके बाद तिमरवानी इंटरचेंज से NH-752D के फोरलेन कॉरिडोर पर पहुंचकर सीधे उज्जैन की ओर जा सकेंगे.
इंदौर, देवास और पीथमपुर को भी मिलेगा फायदा
इस प्रोजेक्ट का लाभ सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से इंदौर, पीथमपुर, देवास और रतलाम जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद माल ढुलाई के लिए भी नया रास्ता खुलेगा. इससे कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान होने तथा लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है.
गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने वालों को भी राहत
तिमरवानी-थांदला-पेटलावाद-बदनावर-उज्जैन कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने वाले ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है. बदनावर-तिमरवानी सेक्शन के अपग्रेड होने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र की तरफ से आने वाले वाहनों को उज्जैन तक बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी.
सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरा करने की तैयारी
अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए इस सड़क परियोजना की अहमियत और बढ़ जाती है. कुंभ के दौरान उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. ऐसे में बेहतर फोरलेन कनेक्टिविटी शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को संभालने में मदद कर सकती है.
आदिवासी क्षेत्रों को भी मिलेगा बेहतर संपर्क
बदनावर-पेटलावाद-थांदला-तिमरवानी का हिस्सा धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरता है. धार जिले के कुछ हिस्से नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम में भी शामिल हैं. सड़क संपर्क बेहतर होने से इन क्षेत्रों में कारोबार, परिवहन और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
किसानों और कारोबारियों को भी फायदा
NH-752D के उज्जैन-बदनावर हिस्से के 4-लेन होने के बाद स्थानीय लोगों को पहले ही यात्रा में राहत मिली है. बताया गया है कि जहां पहले उज्जैन से बदनावर पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर करीब 45 मिनट में पूरा हो रहा है. पूरे कॉरिडोर के विकसित होने के बाद मालवा क्षेत्र के किसानों, कारोबारियों, परिवहन क्षेत्र और उद्योगों को बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिलने की उम्मीद है.


