लखनऊ: पूर्वांचल के संसाधनों और कारोबारी संभावनाओं को निवेश, रोजगार और निर्यात के अवसरों में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ‘यूपी-एज’ परियोजना शुरू करने की तैयारी में है. विश्व बैंक के सहयोग से प्रस्तावित इस पांच वर्षीय परियोजना पर करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
परियोजना का उद्देश्य जिलों की स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसके तहत करीब एक लाख नए कारोबार शुरू कराने और महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है.
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28 जिलों में तैयार होगी विकास की नई कार्ययोजना
यूपी-एज परियोजना को फिलहाल पूर्वांचल के 28 जिलों के लिए तैयार किया गया है. इसमें बुंदेलखंड के सात जिलों को भी शामिल किए जाने की संभावना है. सरकार के अनुसार, राज्य की करीब 40 प्रतिशत आबादी पूर्वांचल में रहती है, जबकि राज्य की जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 27.6 प्रतिशत है. वहीं क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से करीब 45 प्रतिशत कम बताई गई है. करीब 80 प्रतिशत कामगार कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं.
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिले की जरूरत, संसाधन और आर्थिक क्षमता के अनुसार अलग-अलग विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विश्व बैंक के अधिकारियों के साथ परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास के लिए कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना जरूरी है. स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन और पैकेजिंग के साथ देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा. इससे स्थानीय कारोबारियों को नए बाजार मिलने के साथ निर्यात बढ़ाने के अवसर तैयार करने की योजना है. परियोजना की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) अब केंद्र सरकार को भेजी जाएगी.
ODOP को नए बाजारों से जोड़ने की तैयारी
परियोजना में एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) के तहत तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी नए आर्थिक अवसर विकसित करने का प्रस्ताव है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की योजना है.
महिला उद्यमियों और नए कारोबार को बढ़ावा
यूपी-एज के तहत करीब एक लाख नए कारोबार शुरू कराने का लक्ष्य प्रस्तावित है. इसके साथ ही महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. जिलों में स्थानीय संसाधनों के आधार पर बड़े निवेश प्रस्ताव तैयार करने और स्थानीय प्रशासन की क्षमता बढ़ाने की योजना भी परियोजना का हिस्सा है.
वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में कौशल विकास
परियोजना के तहत वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में कौशल विकास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है. स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और हेल्थ टूरिज्म की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा. कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के साथ करीब 10 हजार पॉलीहाउस स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है. इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की योजना है.
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पांच साल में बदलेगी जिलों की आर्थिक तस्वीर
यूपी-एज परियोजना का फोकस एक समान विकास मॉडल के बजाय प्रत्येक जिले की अपनी जरूरत और क्षमता के हिसाब से आर्थिक गतिविधियां विकसित करने पर है. परियोजना लागू होने के बाद निवेश, स्थानीय कारोबार, कौशल विकास, कृषि प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र को एक साथ बढ़ावा देने की योजना है.


