UP News: उत्तर प्रदेश में जमीन और राजस्व से जुड़े कामों के लिए लोगों की भागदौड़ कम होने वाली है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने धारा 116 पोर्टल, EWS पोर्टल और सरलीकृत खतौनी की शुरुआत की है. इनके जरिए जमीन के बंटवारे, नामांतरण यानी दाखिल-खारिज, पैमाइश और EWS प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाने की तैयारी है.
यह भी पढ़ें- ‘पता नहीं G7 खुद को G7 क्यों कहता है…’, पुतिन का पश्चिमी देशों पर तीखा हमला; बोले- BRICS ने पीछे छोड़ा
अब ऑनलाइन कर सकेंगे जमीन के बंटवारे का आवेदन
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है. अब सह-खातेदार जमीन के बंटवारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल होगी. लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध होगी, जिससे आवेदक अपने मामले की स्थिति और प्रगति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे.
GIS से देख सकेंगे जमीन की वास्तविक स्थिति
धारा 116 पोर्टल में GIS टेक्नोलॉजी की सुविधा भी जोड़ी गई है. इससे जमीन की वास्तविक भौगोलिक स्थिति देखने में मदद मिलेगी. भूमि विभाजन से जुड़े मामलों में खतौनी, राजस्व अभिलेख और जमीन के नक्शे की अहम भूमिका होती है. डिजिटल व्यवस्था से इन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है.
EWS प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है. अब आवेदक EWS पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकेंगे. आवेदन के बाद लेखपाल और तहसीलदार की रिपोर्ट ऑनलाइन भेजी जाएगी. आवेदक यह भी देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर है और उसकी प्रगति क्या है. इससे प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है.
सरलीकृत खतौनी में 6 दशमलव तक जमीन का क्षेत्रफल
सरकार ने सरलीकृत खतौनी की भी शुरुआत की है. इसमें जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा. इससे खासकर छोटे भूखंडों और भूमि से जुड़े मामलों में क्षेत्रफल की जानकारी ज्यादा सटीक तरीके से मिल सकेगी. इसके अलावा खतौनी में अभिलेखागार से जुड़े पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
जमीन से जुड़े मामलों में बढ़ेगी पारदर्शिता
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के मुताबिक, तीनों डिजिटल व्यवस्थाओं का उद्देश्य नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया से राहत देना है. नई व्यवस्था से जमीन से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, मामलों की ऑनलाइन निगरानी करने और तय समय में निस्तारण करने में मदद मिलेगी. आवेदन से लेकर अंतिम निस्तारण तक की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जा सकेगा.
यह भी पढ़ें- वाराणसी में बनेगी पहली गेटेड सिटी, VDA ने आनंद काशी योजना के लिए जारी किए हेल्पलाइन नंबर
दाखिल-खारिज, पैमाइश और बंटवारे के मामलों में भी फायदा
नई डिजिटल व्यवस्था का असर सिर्फ EWS प्रमाण पत्र और खतौनी तक सीमित नहीं रहेगा. जमीन से जुड़े नामांतरण (दाखिल-खारिज), पैमाइश, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों के निस्तारण को भी ज्यादा व्यवस्थित करने पर जोर है. सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए बार-बार तहसील और दूसरे सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी ऑनलाइन मिलती रहे.


