नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बड़ा और भावुक मोड़ सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद घोषणा की है कि वह इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने जा रहे हैं. फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने अपनी इस पुरानी इच्छा का जिक्र करते हुए बिहारवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया और भरोसा दिलाया कि उनका रिश्ता जनता से पहले की तरह ही बना रहेगा.
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में बिहारवासियों का आभार जताते हुए लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से लोगों ने उन पर जो विश्वास और समर्थन बनाए रखा, उसी के बल पर उन्होंने बिहार और यहां के लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है. उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास की ताकत से ही बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है.
दिल्ली में राशन कार्ड बनाने के नियम हुए अपडेट, जानें कौन नहीं बनवा सकता?
मुख्यमंत्री ने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें. इसी क्रम में वह इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं. उन्होंने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि उनका यह रिश्ता आगे भी बना रहेगा और वह बिहार को विकसित बनाने के संकल्प को पहले की तरह पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा.
इस बीच राज्यसभा नामांकन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमीत शाह के पटना आने की भी चर्चा है. बताया जा रहा है कि एनडीए के सभी उम्मीदवार एक साथ नामांकन दाखिल करेंगे.
वहीं बीजेपी ने बिहार से राज्यसभा चुनाव के लिए पहले ही अपने दो उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इनमें नितिन नवीन और शिवेश कुमार शामिल हैं. इसके अलावा एनडीए ने उपेन्द्र कुशवाहा को भी राज्यसभा के लिए पांचवां उम्मीदवार बनने की हरी झंडी दे दी है.
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च तय की गई है. यदि जरूरत पड़ी तो 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा. बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है.
संख्या बल के लिहाज से एनडीए को चार सीटें जीतने में कोई कठिनाई नहीं मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जिनमें से बीजेपी के 25 सदस्य हैं. ऐसे में एक सीट जीतने के लिए उसे भी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा.


