Who IS IAS Avinash Singh: उत्तराखंड के जागेश्वर धाम से एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने धार्मिक आस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच बहस छेड़ दी है. तस्वीर में एक सुरक्षाकर्मी मंदिर के गर्भगृह के अंदर कार्बाइन (बंदूक) के साथ नजर आ रहा है, जिसे लेकर मंदिर के पुजारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है.
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क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि अविनाश सिंह, जो वर्तमान में बरेली के जिलाधिकारी हैं, अपने परिवार के साथ जागेश्वर धाम में दर्शन करने पहुंचे थे. इसी दौरान उनका सुरक्षाकर्मी हथियार लेकर गर्भगृह के अंदर प्रवेश कर गया. जैसे ही पुजारियों की नजर हथियारबंद गार्ड पर पड़ी, उन्होंने इसका विरोध किया और इसे मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ बताया. पुजारी पंडित नवीन भट्ट का कहना है कि गर्भगृह में किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना सख्त मना है, फिर भी रोकने के बावजूद सुरक्षाकर्मी अंदर चला गया.
पुजारियों का क्या कहना है?
मंदिर के पुजारियों ने स्पष्ट कहा कि यहां पहले भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे वीआईपी दर्शन करने आ चुके हैं, लेकिन कभी कोई सुरक्षाकर्मी हथियार लेकर गर्भगृह में नहीं गया. उनका आरोप है कि यह मंदिर की धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन है. मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य पुजारी और महामंडलेश्वर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है.
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.
कौन हैं IAS अविनाश सिंह?
अविनाश सिंह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 10 जून 1970 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में हुआ था. उन्होंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की है. 2023 में पहली बार उन्हें अंबेडकर नगर का जिलाधिकारी बनाया गया.2025 में उनका तबादला बरेली कर दिया गया. इससे पहले वे मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं.
क्या है चाणक्य नीति और क्यों आज भी है इतनी चर्चित?
यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन का सवाल बन गया है. जहां एक ओर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्थलों की मर्यादा का सम्मान भी उतना ही अहम है. अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए कोई स्पष्ट नीति बनाई जाती है.


