भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने महत्वपूर्ण संदेश दिया है. दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में अपने समकक्ष चो ह्यून (Cho Hyun) के साथ बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समान सोच और आपसी विश्वास रखने वाले देशों के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है.
उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में भरोसेमंद साझेदारों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए. भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
आतंकवाद और साइबर खतरों पर BRICS देशों का बड़ा फोकस, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
सियोल में हुई उच्चस्तरीय वार्ता
डॉ. जयशंकर इन दिनों दक्षिण कोरिया और मंगोलिया की आधिकारिक यात्रा पर हैं. इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है. दक्षिण कोरिया में उनकी बैठक के दौरान व्यापार, तकनीक, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई.
बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में आपसी सहयोग को और गहरा किया जाना चाहिए.
किन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग?
भारत और दक्षिण कोरिया पहले से ही कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं. अब दोनों देश नई तकनीकों और उभरते उद्योगों में भी साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं.
प्रमुख क्षेत्र
| क्षेत्र | संभावित सहयोग |
|---|---|
| व्यापार और निवेश | द्विपक्षीय कारोबार में वृद्धि |
| सेमीकंडक्टर | तकनीकी सहयोग |
| रक्षा एवं सुरक्षा | रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना |
| जहाज निर्माण | औद्योगिक निवेश और तकनीक |
| हरित ऊर्जा | स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं |
| आपूर्ति श्रृंखला | महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा |
| डिजिटल तकनीक | नवाचार और स्टार्टअप सहयोग |
हाल के महीनों में दोनों देशों के नेताओं ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, जहाज निर्माण और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है.
क्यों महत्वपूर्ण है दक्षिण कोरिया भारत के लिए?
दक्षिण कोरिया एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है. वहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों देशों की साझेदारी कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- तकनीकी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है.
- विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है.
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में नए अवसर बन सकते हैं.
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग बढ़ सकता है.
- वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है.
विशेष रणनीतिक साझेदारी को मिल रही नई दिशा
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है. अप्रैल 2026 में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई वार्ता में भी व्यापार, वित्तीय सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी थी.
दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान, औद्योगिक सहयोग, हरित ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौतों का स्वागत किया था.
वैश्विक चुनौतियों के बीच बढ़ रहा सहयोग
दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है. ऐसे माहौल में भारत और दक्षिण कोरिया जैसे लोकतांत्रिक और समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध न केवल द्विपक्षीय हितों को आगे बढ़ाएंगे बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और विकास को भी समर्थन देंगे.
माता वैष्णो देवी यात्रा ने पार किया 50 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा, पिछले साल से बड़ी बढ़ोतरी
आगे क्या रहेगा फोकस?
जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. आने वाले समय में व्यापार, तकनीक, निवेश, रक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों के प्रमुख स्तंभ बने रह सकते हैं.
Source Ministry of External Affairs, India-South Korea Diplomatic Updates.


