BJP leader under house arrest ahead of CM Yogi visit: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से ठीक पहले एक बेहद चौंकाने वाला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है. मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूची में जगह मिलने के बावजूद, भाजपा के ही एक वरिष्ठ स्थानीय नेता को पुलिस ने उनके घर पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया. यह कार्रवाई भाजपा के जिला कार्यसमिति सदस्य चन्द्रमणि पाण्डेय के साथ हुई है, जिससे स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
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स्वागत सूची में नाम, फिर भी घर में कैद!
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने इस बात की पुष्टि की है. मिश्र के अनुसार, चन्द्रमणि पाण्डेय की ड्यूटी मुख्यमंत्री के प्रस्थान के समय के लिए तय की गई थी और बकायदा स्वागत सूची में उनका नाम भी दर्ज था. इसके बावजूद, पुलिस ने उन्हें उनके आवास से बाहर कदम नहीं रखने दिया.
विरोध का इरादा नहीं, ‘मनोरमा नदी’ के लिए देना था ज्ञापन
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय ने अपनी ही सरकार के प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या धरने का कोई इरादा नहीं था. मैं केवल क्षेत्र की धरोहर मनोरमा नदी की सफाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जनहित से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपना चाहता था. मैंने न तो किसी धरने की योजना बनाई थी और न ही किसी विरोध कार्यक्रम की घोषणा की थी.
प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
चन्द्रमणि पाण्डेय ने इस कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि या तो जिला प्रशासन को इतनी भी जानकारी नहीं थी कि वह भाजपा के जिला कार्यसमिति सदस्य हैं. या फिर प्रशासन ‘मनोरमा नदी’ की बदहाली और उसकी सफाई के मुद्दे पर अपनी नाकामी को मुख्यमंत्री के सामने आने से छुपाना चाह रहा है. उन्होंने आगे भावुक होते हुए कहा कि यदि सत्ताधारी दल के ही कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के सामने जनहित के मुद्दे उठाने से रोका जाएगा, तो आम जनता की आवाज सरकार तक कैसे पहुंचेगी?
प्रशासन की चुप्पी, राजनीतिक चर्चाएं तेज
इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे पर बस्ती जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है. यही वजह है कि भाजपा नेता के इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. हालांकि, मुख्यमंत्री के दौरे के वक्त सत्ताधारी दल के ही नेता को नजरबंद किए जाने की यह घटना पूरे प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग अब यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसके इशारे पर एक स्वागतकर्ता को ही नजरबंद कर दिया गया?


