भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए India-New Zealand Strategic Partnership: Roadmap to 2030 की घोषणा की है. न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक के दौरान इस रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनी.
यह रोडमैप अगले चार वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहयोग, रक्षा, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा कार्ययोजना के रूप में काम करेगा.
राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग होगा मजबूत
रोडमैप के पहले स्तंभ में दोनों देशों ने उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को नियमित बनाने पर सहमति जताई है.
इसके तहत.
- दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों की नियमित बैठकें होंगी.
- विदेश मंत्रियों के बीच नियमित संवाद जारी रहेगा.
- विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा.
- संसद स्तर पर प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान होगा.
- रोडमैप के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक बैठक आयोजित की जाएगी.
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और न्यूजीलैंड रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को नई गति देंगे.
दोनों देशों ने सहमति जताई है कि.
- संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी रहेंगे.
- नौसेना, वायुसेना और थलसेना के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा.
- रक्षा मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद होगा.
- 2025 के रक्षा सहयोग समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.
- द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास आयोजित किए जाएंगे.
- समुद्री सुरक्षा संवाद (Maritime Security Dialogue) शुरू किया जाएगा.
- आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter Terrorism) की पहली बैठक आयोजित की जाएगी.
- साइबर सुरक्षा पर नियमित भारत-न्यूजीलैंड साइबर डायलॉग होगा.
इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी रोकने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा.
2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.
इसके लिए.
- भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाया जाएगा.
- कस्टम प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा.
- अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) व्यवस्था लागू की जाएगी.
- व्यापार को तेज और सरल बनाने के लिए सहयोग बढ़ेगा.
कृषि, डेयरी और बागवानी में नई साझेदारी
रोडमैप के तहत दोनों देश.
- बागवानी अनुसंधान
- कृषि तकनीक
- डेयरी क्षेत्र
- पशुपालन
- वानिकी (Forestry)
में सहयोग बढ़ाएंगे.
ज्ञान साझा करने, अनुसंधान और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों ने पर्यटन क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है.
मुख्य पहलें होंगी.
- पर्यटन सहयोग समझौते को लागू करना.
- दोनों देशों के बीच सीधे (Non-Stop) उड़ानें शुरू करने को प्रोत्साहित करना.
- पर्यटन उद्योग के बीच साझेदारी बढ़ाना.
इससे दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है.
शिक्षा, विज्ञान और नई तकनीकों पर जोर
रोडमैप में शिक्षा और अनुसंधान को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.
दोनों देश.
- शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाएंगे.
- छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे.
- कृषि, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और उभरती तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान करेंगे.
- विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई साझेदारियां विकसित करेंगे.
AI, सौर ऊर्जा और जैव ईंधन पर सहयोग
दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों पर भी साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है.
इनमें प्रमुख हैं.
- Artificial Intelligence
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
- International Solar Alliance
- Global Biofuels Alliance
- स्वच्छ ऊर्जा
- कम कार्बन उत्सर्जन तकनीक
इससे सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.
लोगों के बीच संबंध होंगे मजबूत
रणनीतिक साझेदारी के तहत.
- भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका मजबूत की जाएगी.
- खेल सहयोग बढ़ेगा.
- पारंपरिक चिकित्सा पर विशेषज्ञों का आदान-प्रदान होगा.
- सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम आयोजित होंगे.
- समुद्री विरासत और स्थानीय निकायों के बीच भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र और इंडो-पैसिफिक पर साझा दृष्टिकोण
दोनों देशों ने.
- नियम आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था का समर्थन किया.
- अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषकर UNCLOS के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया.
- संयुक्त राष्ट्र सुधारों का समर्थन किया.
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन दोहराया.
- बहुपक्षीय संस्थाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है यह रोडमैप
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार India-New Zealand Strategic Partnership: Roadmap to 2030 दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा तय करने वाला साझा दस्तावेज है.
इससे कोई वित्तीय दायित्व उत्पन्न नहीं होता और न ही यह घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता है.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत-न्यूजीलैंड Strategic Partnership की घोषणा कब हुई?
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने 11 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में इसकी घोषणा की.
2. दोनों देशों ने व्यापार के लिए क्या लक्ष्य रखा है?
वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
3. किन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा?
रक्षा, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, पर्यटन, कृषि, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, संस्कृति और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा.
4. क्या यह रोडमैप कानूनी रूप से बाध्यकारी है?
नहीं. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह साझा सहयोग का रोडमैप है और इससे कोई कानूनी या वित्तीय दायित्व उत्पन्न नहीं होता.
Source: Govt Of India


