Varanasi News: पूर्वांचल के विकास और काशी आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बुधवार का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ. केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी शहर को ट्रैफिक जाम से पूरी तरह मुक्त करने और कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए दो बेहद महत्वाकांक्षी परियोजनाओं गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स पर करीब ₹25,000 करोड़ की लागत आने की संभावना है. यह परियोजना साल 2028 तक पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद लखनऊ, प्रयागराज और जौनपुर से काशी आने वाले लोगों को शहर के भारी ट्रैफिक का सामना नहीं करना पड़ेगा.
घाटों का सफर अब 60 की जगह 20 मिनट में
₹12,600 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाला यह 46 किलोमीटर लंबा 6-लेन कॉरिडोर गंगा नदी के समानांतर तैयार किया जाएगा. यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे 19 (NH-19) को सीधे वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. इसके बनने से अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट और काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा. वर्तमान में जो दूरी तय करने में 60 मिनट लगते हैं, वह घटकर मात्र 20 मिनट रह जाएगी. इस कॉरिडोर पर वाहनों की औसत रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी.
प्रभावित होने वाले गांव
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत नमो घाट पर बनने वाला एक अनोखा डबल डेकर स्ट्रक्चर होगा. इसके ऊपरी हिस्से पर रेलवे की लेन होगी और नीचे 6-लेन का हाईवे संचालित होगा. गंगा के प्राकृतिक दृश्यों और घाटों की साख को बिना नुकसान पहुंचाए इसे डिजाइन किया गया है. इसमें एक शानदार केबल-स्टेड ब्रिज (तारों पर टिका पुल), पर्यटकों के लिए व्यू-पॉइंट, दर्शक गैलरी और नदी पार करने के लिए तीन पैदल चलने वाले झूला पुल भी बनाए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. समना, डोमरी, सीरगोवर्धनपुर, छितुपुर, किला कोहना, कोरौटा, रामनगर, भगवानपुर, सुजाबाद, नगवा, नदेसर और वारिदपुर जैसे गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है.
वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर: शहर के अंदरूनी ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति
शहर के भीतर गाड़ियों के भारी दबाव को आउटर रिंग रोड की तरफ मोड़ने के लिए वरुणा नदी के समानांतर 43.2 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹11,000 करोड़ (शुरुआती अनुमान ₹6,000 करोड़ से बढ़ाकर) खर्च होने की उम्मीद है. यह कॉरिडोर वाराणसी में वरुणा नदी के समानांतर हरगिज-राजा तालाब आउटर रिंग रोड से शुरू होकर सीधे नमो घाट तक जाएगा. इसके कुल हिस्से में से 21.15 किलोमीटर का हिस्सा 4-लेन का होगा, जबकि शेष हिस्सा 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. यह नेशनल हाईवे 31 (NH-31) को सीधे वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. इस रूट में कई फ्लाईओवर, लूप, रैंप और मुख्य सड़कों को जोड़ने वाले लिंक रोड का एक मजबूत नेटवर्क शामिल होगा. यह कॉरिडोर वाराणसी सदर और पिंडरा तहसील के दर्जनों गांवों से होकर गुजरेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों का तेजी से शहरीकरण और विकास होगा.
वाराणसी रिंग रोड और वरुणा तीर्थ कॉरिडोर का इंटीग्रेटेड प्लान
NHAI इस पूरे प्रोजेक्ट को एक बड़े ग्रिड के रूप में विकसित कर रहा है. वरुणा तीर्थ कॉरिडोर के तहत 21.15 किमी के दायरे में आने वाले 41 गांवों (गंगा किनारे) और NH-19 से रिंग रोड तक 18 किमी के दायरे में आने वाले 11 गांवों से भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है. प्रशासनिक सुरक्षा के लिहाज से इन सभी चिन्हित गांवों में जमीनों की रजिस्ट्री और खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है ताकि प्रोजेक्ट बिना किसी बाधा के समय पर (2028 तक) पूरा हो सके.
पूर्वांचल के लिए ‘गेम चेंजर’
कैबिनेट के इस फैसले से न केवल वाराणसी शहर को जाम की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिलेगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स, व्यापार और पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलेगा. प्रयागराज, लखनऊ और जौनपुर से आने वाली गाड़ियां अब बिना किसी रुकावट के सीधे बाबा विश्वनाथ के दरबार की दहलीज तक पहुंच सकेंगी.


