कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 22 जुलाई को 7वें राज्य वेतन आयोग (CPC) का आधिकारिक गठन कर दिया है. नई सरकार का लक्ष्य मौजूदा वित्त वर्ष के भीतर आयोग की सिफारिशों को लागू करना है. खास बात यह है कि गठित पैनल जरूरत पड़ने पर केंद्र के 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी विचार कर सकेगा, जिससे कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
चार सदस्यीय आयोग राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों, महंगाई भत्ता (DA), यात्रा भत्ता (TA), सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं की व्यापक समीक्षा करेगा. वित्त विभाग के आदेश के मुताबिक आयोग अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर या सरकार द्वारा तय की गई अतिरिक्त अवधि में सौंपेगा.
आयोग का मुख्यालय कोलकाता में होगा, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर राज्य के अन्य स्थानों या नई दिल्ली में भी बैठकें आयोजित की जा सकेंगी. आयोग विभिन्न सरकारी विभागों, संस्थानों, निगमों और वैधानिक निकायों के कर्मचारियों के वेतन ढांचे को तर्कसंगत बनाने के साथ-साथ सरकारी सेवा में प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित और बनाए रखने के लिए नई सिफारिशें देगा.
आयोग महंगाई भत्ते (DA) की समीक्षा कर नए वेतन ढांचे के अनुरूप फॉर्मूला भी सुझाएगा. इसके अलावा विशेष भत्तों, अन्य भत्तों और रियायतों की भी समीक्षा की जाएगी. गौरतलब है कि मई में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी. यह पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार के दौरान उठाया था.
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उधर, केंद्रीय कर्मचारियों को भी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है. माना जा रहा है कि यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो अगले साल की पहली छमाही में आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है.


