Kanpur-Kabraei Greenfield Expressway: कानपुर और बुंदेलखंड के बीच कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 7,145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को मंजूरी दे दी है. इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से न केवल कानपुर से कबरई के बीच यात्रा का समय 4 से 5 घंटे से घटकर मात्र 1.5 घंटा रह जाएगा, बल्कि इसके रूट में आने वाले 93 गांवों में उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
93 गांवों को सीधे मिलेगा विकास का लाभ
एनएचएआई (NHAI) के निदेशक पंकज यादव के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे के दायरे में तीन जिलों के कुल 93 गांव शामिल हैं. बता दें कि कानपुर के 49 गांव, हमीरपुर के 35 गांव, महोबा के 9 गावों का नाम है. इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद इन ग्रामीण इलाकों में उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा, इतना ही नहीं यहां के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा आसपास की जमीनों की किमत भी बढ़ जाएगी.
खनन और कृषि को मिलेगी रफ्तार
वर्तमान में कानपुर और कबरई के बीच आवागमन के लिए मुख्य रूप से नेशनल हाईवे-34 (NH-34) का ही विकल्प मौजूद है, जहां अक्सर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बनी रहती है.नए एक्सप्रेस-वे के चालू होने से बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश से आने वाले पत्थर, खनिज और अन्य खनन सामग्री बिना किसी बाधा के कानपुर पहुंचेगी. कानपुर व आसपास के कृषि उत्पाद कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा.
कानपुर रिंग रोड से कबरई तक बनेंगे 8 इंटरचेंज
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे कानपुर रिंग रोड के मगरासा से शुरू होकर बांदा-रायबरेली मार्ग पर कबरई में मिलेगा. यात्रियों और मालवाहकों के सुगम आवागमन के लिए पूरे मार्ग पर 8 इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इन इंटरचेंज के माध्यम से यह एक्सप्रेस-वे सीधे पुखरायां-घाटमपुर-बिंदकी मार्ग, हमीरपुर-कालपी रोड, हमीरपुर-राठ मार्ग, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा.
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सभी आवश्यक अनापत्तियां (NOC) पूरी
परियोजना के लिए रेलवे, सिंचाई विभाग सहित सभी संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं. यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि कानपुर और बुंदेलखंड के संपूर्ण औद्योगिक व सामाजिक परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी.


