Delhi Metro Golden Line: दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत निर्माणाधीन तुगलकाबाद-एरोसिटी (गोल्डन लाइन) कॉरिडोर का काम अंतिम चरणों में पहुंच चुका है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अनुसार, इस पूरे 23.622 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का लगभग 81 प्रतिशत ढांचागत (सिविल) निर्माण पूरा कर लिया गया है. DMRC इस साल के अंत तक गोल्डन लाइन का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. हालांकि, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस लाइन पर परिचालन चरणबद्ध तरीके से (Phased Manner) शुरू किया जाएगा. माना जा रहा है कि नेब सराय से एरोसिटी के बीच के हिस्से को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले खोला जा सकता है.
नेब सराय से एरोसिटी तक क्यों शुरू हो सकती है पहली मेट्रो?
नेब सराय से महिपालपुर तक की अंडरग्राउंड टनल का काम पूरा हो चुका है. अंतिम चरण में महिपालपुर-एरोसिटी टनल: महिपालपुर से एरोसिटी के बीच महज 1.4 किलोमीटर के हिस्से में सुरंग खोदी जानी बाकी है, जहां 2 टनल बोरिंग मशीनें (TVM) दिन-रात काम कर रही हैं. आगामी कुछ महीनों में यह काम भी पूरा हो जाएगा. नेब सराय से एरोसिटी के बीच 8 भूमिगत स्टेशन बन रहे हैं, जिनमें से किशनगढ़, छतरपुर और छतरपुर मंदिर स्टेशन काफी हद तक बनकर तैयार हैं.
15 स्टेशन, 11 होंगे भूमिगत
तुगलकाबाद से एरोसिटी तक बनने वाली इस लाइन पर कुल 15 स्टेशन होंगे, जिनमें 11 भूमिगत और चार एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं. संगम विहार से साकेत जी ब्लॉक तक का 4.27 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जहां साकेत जी ब्लॉक, अंबेडकर नगर, खानपुर-वायुसेनाबाद और संगम विहार स्टेशन बनाए जा रहे हैं.
स्टेशनों पर होंगे आधुनिक सुरक्षा इंतजाम
गोल्डन लाइन के सभी स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा एस्केलेटर, लिफ्ट और अन्य आधुनिक सुविधाओं का भी निर्माण तेजी से चल रहा है. एरोसिटी स्टेशन भविष्य में दिल्ली मेट्रो की एक्सप्रेस लाइन और दिल्ली-अलवर नमो भारत कॉरिडोर से भी जुड़ेगा. इसी को ध्यान में रखते हुए यहां 290 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, जो दिल्ली मेट्रो का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म होगा.
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फेज-4 की सबसे लंबी सुरंग
नेब सराय से एरोसिटी तक करीब 16.69 किलोमीटर लंबा भूमिगत हिस्सा फेज-4 की सबसे लंबी मेट्रो सुरंग होगा. इस सेक्शन में किशनगढ़, छतरपुर और छतरपुर मंदिर समेत आठ भूमिगत स्टेशनों का निर्माण तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुका है. गोल्डन लाइन के शुरू होने के बाद दक्षिण दिल्ली और एयरपोर्ट के बीच सफर न केवल तेज होगा, बल्कि लाखों यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का भी लाभ मिलेगा.


