Gorakhpur Siliguri Expressway: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है . लंबे समय से फॉरेस्ट क्लीयरेंस और भूमि अधिग्रहण की अड़चनों में फंसी इस परियोजना के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बिहार सरकार को संशोधित फॉरेस्ट क्लीयरेंस आवेदन सौंपा है . इससे परियोजना को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है’.
दिल्ली से पटना का सफर होगा आसान
37 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने के बाद सड़क यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा.
- दिल्ली से पटना: 14-15 घंटे से घटकर करीब 8 घंटे
- गोरखपुर से सिलीगुड़ी: लगभग 13 घंटे से घटकर करीब 5.5 घंटे
इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा .
बिहार के 8 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
करीब 525 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा हिस्सा बिहार में बनेगा . राज्य में लगभग 415 किलोमीटर लंबा मार्ग इन आठ जिलों से होकर गुजरेगा. पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज से होकर गुजरेगा. परियोजना की शुरुआत चार लेन से होगी, जिसे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जाएगा. इसके लिए 100 मीटर चौड़ी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.
फॉरेस्ट क्लीयरेंस सबसे बड़ी चुनौती
एनएचएआई ने बिहार में वन क्षेत्र से प्रभावित 267.35 किलोमीटर हिस्से के लिए संशोधित फॉरेस्ट क्लीयरेंस आवेदन भेजा है. वन विभाग की आपत्तियों के बाद पेड़ों की कटाई कम करने के लिए कई स्थानों पर एलाइनमेंट में बदलाव किया गया है.
किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर?
पश्चिम और पूर्वी चंपारण में करीब 97.15 किमी हिस्सा वन क्षेत्र से प्रभावित .
अररिया से किशनगंज तक 132.30 किमी हिस्सा पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील .
सुपौल में 37.90 किमी हिस्से के लिए वन स्वीकृति की प्रक्रिया जारी .
जमीन अधिग्रहण भी बना बड़ी बाधा
फॉरेस्ट क्लीयरेंस के अलावा भूमि अधिग्रहण भी परियोजना में देरी का प्रमुख कारण है. हालांकि बिहार सरकार ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए संबंधित जिलों के अधिकारियों को लंबित मामलों के जल्द निपटारे के निर्देश दिए हैं. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को बिहार के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है. इसके बनने से सीमांचल, कोसी और चंपारण क्षेत्रों में निवेश बढ़ने, उद्योगों को बढ़ावा मिलने, कृषि उत्पादों की तेज ढुलाई, पर्यटन के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. प्रस्तावित मार्ग में करीब 90 किमी उत्तर प्रदेश, 415 किमी बिहार और 20 किमी पश्चिम बंगाल में बनेगा. हालांकि फॉरेस्ट क्लीयरेंस और भूमि अधिग्रहण में देरी जारी रही तो परियोजना की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है. यदि सभी मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की सड़क कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है.


