Delhi Master Plan 2047: दिल्ली-NCR की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में कई बड़े प्रावधान किए गए हैं. योजना के तहत दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए चार नीतिगत लिंक कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है. इनके बनने से दिल्ली की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और एयरपोर्ट से लेकर NCR के प्रमुख इलाकों तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. दिल्ली के शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को मास्टर प्लान 2047 जारी किया.
चार लिंक कॉरिडोर से बदलेगा दिल्ली-NCR का रोड नेटवर्क
मास्टर प्लान में प्रस्तावित चार प्रमुख कॉरिडोर दिल्ली को NCR के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ेंगे.
- पहला कॉरिडोर: NH-1 से गाजियाबाद के लोनी-बागपत एक्सप्रेसवे तक UER-1 के उत्तरी विस्तार के जरिए बनाया जाएगा.
- दूसरा कॉरिडोर: NH-8 यानी द्वारका से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक UER-2 के दक्षिणी विस्तार के जरिए विकसित होगा.
- तीसरा कॉरिडोर: द्वारका सेक्टर-21 से गुरुग्राम हुडा सिटी सेंटर तक कनेक्टिविटी देगा.
- चौथा कॉरिडोर: द्वारका से AIIMS झज्जर तक बनाया जाएगा.
दिल्ली के रिंग रोड पर घटेगा ट्रैफिक
इन कॉरिडोर के बनने से सोनीपत, नरेला और बवाना की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को गाजियाबाद की दिशा में जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता मिलेगा. इससे दिल्ली के रिंग रोड, सिग्नेचर ब्रिज और वजीराबाद पुल जैसे व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है. NH-1 से लोनी-बागपत एक्सप्रेसवे तक UER-1 के विस्तार से दिल्ली में NH-1 और GT रोड पर भी ट्रैफिक कम करने में मदद मिलेगी.
IGI और जेवर एयरपोर्ट के बीच सीधा कनेक्शन
मास्टर प्लान का एक बड़ा फायदा एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को माना जा रहा है. UER-2 के दक्षिणी विस्तार के जरिए द्वारका-NH-8 से ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे होते हुए जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सीधा कनेक्शन विकसित किया जाएगा. इससे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट के बीच भी यात्रियों को एक नया सड़क मार्ग मिल सकेगा.
100 मंजिला इमारतों का रास्ता साफ
मास्टर प्लान 2047 में दिल्ली में ऊंची इमारतों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत कुछ निर्धारित क्षेत्रों में 100 मंजिल तक की इमारतें बनाए जाने की संभावना होगी. इसके अलावा 30 मीटर चौड़ी सड़कों पर भूतल पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है.
भीड़ कम करने के लिए लगेगा ‘कंजेशन प्राइज’
दिल्ली की सड़कों पर बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मास्टर प्लान में कंजेशन प्राइज यानी भीड़-भाड़ शुल्क का प्रावधान भी रखा गया है. इसका उद्देश्य व्यस्त मार्गों पर निजी वाहनों की संख्या कम करना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करना है.
प्रवासियों और कामगारों के लिए सस्ते किराए के घर
मास्टर प्लान में दिल्ली में प्रवासियों और कामगारों के लिए कम किराए वाले मकान और हॉस्टल बढ़ाने का प्रस्ताव है. घनी और अनियोजित बस्तियों में सामुदायिक भवनों और बहुउद्देश्यीय स्थानों का इस्तेमाल आपदा के समय राहत कार्यों के लिए किया जा सकेगा.
घर के पास काम करने की सुविधा
योजना में को-वर्किंग और साझा कार्यस्थलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है. घर से काम करने वाले लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि महामारी जैसी परिस्थितियों में कार्यालयों में भीड़ कम की जा सके.
भूकंप से बचाव के लिए भवनों का सेफ्टी ऑडिट
दिल्ली भूकंपीय जोन-4 में आती है. ऐसे में मास्टर प्लान में भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है. भवन मालिकों और संबंधित स्थानीय निकायों को नियमों के अनुसार स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराना होगा. संवेदनशील इलाकों में इसे प्राथमिकता दी जाएगी.
पुराने इलाकों में तारों के जाल से मिलेगी राहत
पुरानी दिल्ली, शहरी गांवों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़कों पर लटकते बिजली के तार और खुले केबल हटाने की दिशा में भी काम किया जाएगा. बिजली विभाग, स्थानीय निकाय और अन्य एजेंसियां मिलकर बिजली सुरक्षा को बेहतर बनाएंगी.
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जलभराव और बाढ़ से निपटने पर जोर
मास्टर प्लान 2047 में दिल्ली के जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए हरित क्षेत्रों को बढ़ाने और बारिश के पानी को प्राकृतिक तरीके से संभालने वाली शहरी डिजाइन को बढ़ावा देने की बात कही गई है. नालों की नियमित सफाई, गाद निकालने और निकली गाद के उचित निस्तारण की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी.


