Katni-Singrauli Expressway Connectivity Project: मध्य प्रदेश में प्रस्तावित कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे महाकौशल और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है. करीब 232 किलोमीटर लंबे इस हाईस्पीड कॉरिडोर के बनने से मध्य प्रदेश का उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से सड़क संपर्क मजबूत होगा. साथ ही प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे शहरों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
इस परियोजना की DPR मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की ओर से तैयार की जा रही है. एक्सप्रेसवे को उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ आयोजन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की लंबी दूरी वाली कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली परियोजनाओं में शामिल किया गया है.
यूपी को मिला नया हाईस्पीड कॉरिडोर, नेपाल तक आसान होगी कनेक्टिविटी
कटनी-सिंगरौली के बीच 67 KM कम होगी दूरी
फिलहाल कटनी और सिंगरौली के बीच करीब 299 किलोमीटर की दूरी है. सड़क मार्ग से इस सफर में लगभग 6 घंटे 15 मिनट लगते हैं. प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बनने के बाद दूरी करीब 232 किलोमीटर रह जाने का अनुमान है.
यानी दोनों शहरों के बीच करीब 67 किलोमीटर की दूरी कम होगी. यात्रा का समय भी घटकर करीब 3 घंटे 30 मिनट तक आने की उम्मीद है. इससे लगभग 2 घंटे 45 मिनट तक समय की बचत हो सकती है.
प्रयागराज-वाराणसी और मिर्जापुर तक आसान होगी पहुंच
सिंगरौली की सीमा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से लगती है. एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश से सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे के वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे से जुड़ने की योजना है. इससे कटनी, रीवा और प्रदेश के दूसरे हिस्सों से आने वाले वाहनों को वाराणसी और मिर्जापुर के हाईवे नेटवर्क तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी. इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
छत्तीसगढ़ से भी जुड़ेगा हाईस्पीड कॉरिडोर
इस एक्सप्रेसवे का फायदा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा. सिंगरौली और सीधी के रास्ते यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों से भी कनेक्टिविटी मजबूत करेगा. अंबिकापुर और मनेंद्रगढ़ जैसे शहरों को जोड़ने की योजना से छत्तीसगढ़ से कटनी, जबलपुर और भोपाल की ओर जाने वाले वाहनों को बेहतर वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा. इससे विंध्य क्षेत्र में माल ढुलाई के लिए नया लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर विकसित होने की संभावना है.
झारखंड के कोयला बेल्ट को भी फायदा
सिंगरौली खुद देश के प्रमुख ऊर्जा और कोयला क्षेत्रों में शामिल है. एक्सप्रेसवे के जरिए सिंगरौली-सीधी क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने से झारखंड के धनबाद और रांची की दिशा में जाने वाले भारी मालवाहक वाहनों को भी फायदा मिल सकता है. इससे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल ढुलाई का नेटवर्क मजबूत होने की उम्मीद है.
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
बेहतर कनेक्टिविटी का असर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. मैहर स्थित शारदा देवी मंदिर और जबलपुर का भेड़ाघाट जैसे पर्यटन स्थलों की पहुंच प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों से आसान हो सकती है. यानी यह एक्सप्रेसवे सिर्फ औद्योगिक कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
Hybrid Annuity Model पर तैयार होगा प्रोजेक्ट
कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे को Hybrid Annuity Model (HAM) के तहत विकसित किए जाने की योजना है. इस मॉडल में परियोजना की लागत का एक हिस्सा सरकार और बाकी निजी डेवलपर की ओर से लगाया जाता है. आपके दिए विवरण के अनुसार, करीब 40 फीसदी निवेश सरकार और 60 फीसदी निजी कंपनी की ओर से किया जाएगा. निजी निवेश की राशि का भुगतान सरकार निर्धारित अवधि में ब्याज समेत करेगी. सड़क बनने के बाद टोल से होने वाली वसूली की व्यवस्था सरकार के पास रहेगी.
MP के लिए क्यों अहम है ये एक्सप्रेसवे?
कटनी से सिंगरौली की दूरी और यात्रा समय कम होगा.
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर और वाराणसी से कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
प्रयागराज तक सड़क संपर्क बेहतर होगा.
छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों तक पहुंच आसान होगी.
औद्योगिक और कोयला क्षेत्रों के लिए माल ढुलाई सुगम होगी.
मैहर, जबलपुर और विंध्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है.
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच हाईस्पीड रोड नेटवर्क मजबूत होगा.


