B35 Bullet Train: भारत अब सिर्फ जापानी तकनीक के सहारे बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि देश में अपनी हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है. भारतीय रेलवे 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी B35 बुलेट ट्रेन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक इसका लक्ष्य 2030 तक इस ट्रेन को विकसित करना है.
यह योजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के साथ भी जुड़ी हुई है. हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर शुरुआती सेवा के लिए B35 नहीं, बल्कि भारत में बन रही B28 ट्रेनसेट को इस्तेमाल करने की योजना है.
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क्या है B35 बुलेट ट्रेन?
B35 भारत में विकसित की जाने वाली अगली पीढ़ी की हाई-स्पीड ट्रेन को दिया गया नाम है. इसका डिजाइन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए किया जा रहा है. रेलवे की योजना के मुताबिक यह ट्रेन भारतीय परिस्थितियों और भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को ध्यान में रखकर विकसित की जाएगी.
B35 का विकास भारत के हाई-स्पीड रेल सिस्टम में स्वदेशी तकनीक बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है. इसके लिए ट्रेन के अलग-अलग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स और ट्रेन कंट्रोल तकनीक को देश में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है.
पहले आएगी B28 ट्रेन
B35 से पहले भारत में तैयार की जा रही B28 ट्रेनसेट का इस्तेमाल मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के शुरुआती हिस्से में किए जाने की योजना है. B28 की डिजाइन स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है.
रेलवे मंत्रालय ने पहले ही संकेत दिया है कि मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के शुरुआती 97 किलोमीटर लंबे सूरत-वापी सेक्शन पर B28 से सेवा शुरू करने की तैयारी है. इस सेक्शन पर सेवा अगस्त 2027 में शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है.
B28 ट्रेनसेट का निर्माण भारत में BEML के सहयोग से किया जा रहा है. सरकारी जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे देश में 280 किलोमीटर प्रति घंटे की क्षमता वाले स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन और निर्माण की दिशा में काम कर रहा है.
B35 की रफ्तार कितनी होगी?
B35 की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जा रही है. यहां डिजाइन स्पीड और वास्तविक परिचालन स्पीड में अंतर समझना जरूरी है.
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसकी परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है. इसलिए भविष्य में B35 के 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन क्षमता का मतलब यह नहीं है कि ट्रेन हर समय यात्रियों के साथ 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी.
जापान की E10 ट्रेन से होगी तुलना
B35 का विकास ऐसे समय में किया जा रहा है जब जापान अपनी अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की ओर बढ़ रहा है. रिपोर्टों के अनुसार भारत की B35 को जापान की E10 सीरीज के समान 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली ट्रेन के तौर पर विकसित करने की योजना है.
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के शुरुआती चरण में जापानी Shinkansen तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन आगे चलकर भारत अपने हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में घरेलू तकनीक और निर्माण क्षमता का हिस्सा बढ़ाना चाहता है.
अपना ट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी बनाएगा भारत
B35 परियोजना का एक अहम हिस्सा ट्रेन कंट्रोल तकनीक भी है. रिपोर्टों के मुताबिक भारत अपना स्वदेशी Bharat Train Control System विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है.
हाई-स्पीड रेल में ट्रेन की गति, सुरक्षित दूरी, सिग्नलिंग और संचालन को नियंत्रित करने के लिए एडवांस ट्रेन कंट्रोल सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होता है. स्वदेशी सिस्टम विकसित होने से भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में घरेलू तकनीक के इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है.
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर कितना लंबा है?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर करीब 508 किलोमीटर लंबा है. इसमें 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं. सरकारी जानकारी के अनुसार मुंबई से अहमदाबाद के बीच पूरी यात्रा करीब 1 घंटे 58 मिनट में पूरी करने की योजना है. इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा है.
फिलहाल परियोजना पर काम जारी है और शुरुआती सेवा सूरत-वापी सेक्शन से शुरू करने की योजना है.
भारत में बुलेट ट्रेन निर्माण का बड़ा बदलाव
सितंबर 2026 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि भारत में बन रही स्वदेशी बुलेट ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम तैयार हो चुका है और इसे टेस्टिंग के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है. उनके अनुसार ट्रेन मई या जून 2027 तक टेस्टिंग के लिए ट्रैक पर आ सकती है. इससे संकेत मिलता है कि भारत हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण के लिए घरेलू औद्योगिक क्षमता विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है.
भविष्य में कई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
भारत की हाई-स्पीड रेल योजना सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद तक सीमित नहीं है. सरकार ने भविष्य के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पहचान की है, जिनकी कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर बताई गई है.
इनमें दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, चेन्नई-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई और वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर शामिल हैं. ऐसे में B35 जैसी स्वदेशी ट्रेन का विकास भविष्य में भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी आधार तैयार कर सकता है.
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भारत 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली B35 स्वदेशी बुलेट ट्रेन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है और इसे 2030 तक तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है. इससे पहले B28 ट्रेनसेट के जरिए मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल के शुरुआती हिस्से पर भारत में बनी ट्रेन से सेवा शुरू करने की तैयारी है.
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर की लंबाई करीब 508 किलोमीटर है और इसकी डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. B35 के साथ ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसी तकनीकों को भी देश में विकसित करने की कोशिश की जा रही है. इससे भारत के भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में स्वदेशी निर्माण और तकनीक की भूमिका बढ़ सकती है.


