ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर है. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले इंटरचेंज का निर्माण तेजी से चल रहा है और इसके 15 अक्टूबर तक पूरा होने की संभावना है. इंटरचेंज के तैयार होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
इस इंटरचेंज के बनने से दोनों एक्सप्रेसवे के बीच यात्रा करने वाले वाहन चालकों को ग्रेटर नोएडा के रास्ते लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम होने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें- यूपी में मुंबई जैसी AC लोकल ट्रेनें! लखनऊ-कानपुर और गाजियाबाद-अलीगढ़ से शुरुआत, जानें पूरा प्लान
83 हेक्टेयर में बन रहा इंटरचेंज
जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास बनाए जा रहे इस इंटरचेंज में चार लूप और आठ रैंप बनाए जा रहे हैं. इनकी कुल लंबाई करीब 13.308 किलोमीटर है. पूरा इंटरचेंज करीब 83 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. इसके निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
इंटरचेंज के जरिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे आपस में सीधे जुड़ेंगे. इसके अलावा यमुना प्राधिकरण क्षेत्र की 60 मीटर चौड़ी सड़क को भी इस इंटरचेंज से जोड़ा जाएगा.
20 KM कम होगी दूरी, ग्रेटर नोएडा का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर
अभी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को कई जगहों पर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. नए इंटरचेंज के शुरू होने के बाद दोनों एक्सप्रेसवे के बीच सीधा कनेक्शन मिल जाएगा. इससे करीब 20 किलोमीटर का सफर कम हो सकता है. साथ ही यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होने की उम्मीद है.
UPITS के दौरान सीमित रूप से खोलने की तैयारी
25 सितंबर से शुरू होने वाले UP International Trade Show (UPITS) को देखते हुए यमुना प्राधिकरण इस इंटरचेंज को सीमित स्तर पर वाहनों के लिए खोलने की संभावना तलाश रहा है. प्राधिकरण की कोशिश है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तरफ से आने वाले लोगों को इस इंटरचेंज के जरिए यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने की सुविधा मिल सके.
खासकर फरीदाबाद और गाजियाबाद की तरफ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर आने वाले वाहनों को अगर यमुना एक्सप्रेसवे पर उतरने की सुविधा मिलती है, तो UPITS पहुंचने वाले लोगों को समय और दूरी दोनों में राहत मिल सकती है.
NHAI करेगा अंतिम फैसला
इंटरचेंज को सीमित स्तर पर खोलने को लेकर यमुना प्राधिकरण की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि, इसके संचालन और यातायात शुरू करने का अंतिम फैसला भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से किया जाएगा. यीडा के CEO राकेश कुमार सिंह के मुताबिक, इस संबंध में अंतिम निर्णय NHAI को लेना है.
NHAI चेयरमैन ने किया था निरीक्षण
पिछले महीने NHAI चेयरमैन संतोष यादव ने इंटरचेंज के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया था. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और परियोजना को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे.
इंटरचेंज की खास बातें
यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे सीधे जुड़ेंगे
- निर्माण पूरा होने की संभावित तारीख: 15 अक्टूबर
- करीब 20 KM दूरी कम होने की उम्मीद
- 4 लूप और 8 रैंप
- कुल लंबाई करीब 13.308 KM
- इंटरचेंज करीब 83 हेक्टेयर में
- अनुमानित लागत करीब 500 करोड़ रुपये
- यीडा की 60 मीटर चौड़ी सड़क से भी कनेक्शन
- फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को फायदा
यह भी पढ़ें- शुक्र वक्री 2026: अक्टूबर में पलटेगी चाल, इन 4 राशियों की लव लाइफ और जेब पर पड़ेगा भारी असर!
अगर इंटरचेंज को UPITS के दौरान सीमित रूप से खोलने की अनुमति मिलती है, तो 25 सितंबर से शुरू होने वाले आयोजन में पहुंचने वाले यात्रियों के लिए यह कनेक्टिविटी काफी उपयोगी साबित हो सकती है. वहीं, पूरी तरह तैयार होने के बाद दोनों एक्सप्रेसवे के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों को करीब 20 किलोमीटर तक कम दूरी तय करनी पड़ सकती है.


