यूपी कोटे की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनावी मुकाबला अब और रोचक होता दिख रहा है. भाजपा ने नौवां नामांकन पत्र खरीदकर राज्यसभा चुनाव के रोमांच को बढ़ा दिया है. इसके साथ ही पार्टी ने विरोधी खेमे में सेंधमारी की मुहिम भी तेज कर दी है. इसे सपा के तीसरा प्रत्याशी उतारने के ऐलान के बाद भाजपा के पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 25 सपा विधायकों के संपर्क में होने की बात कहकर सियासी सस्पेंस और बढ़ा दिया है.
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है और यह छह अक्तूबर तक चलेगी. सपा के दो प्रत्याशियों का नामांकन हो चुका है, लेकिन तीसरे प्रत्याशी को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है. दूसरी ओर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. हालांकि राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी दांव-पेंच का सिलसिला तेज हो गया है.
इन 10 सीटों के लिए शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया में आठ सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि एक-एक सीट सपा और बसपा के पास थी. अब किसी भी दल को एक प्रत्याशी जिताने के लिए 37 वोटों की जरूरत है.
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सपा को तीसरे के लिए जोड़तोड़ करनी होगी
इस हिसाब से सपा दो प्रत्याशियों को तो आसानी से जिता लेगी, लेकिन तीसरे प्रत्याशी के लिए उसे जोड़तोड़ करनी होगी. इसी को लेकर अखिलेश यादव ने बागियों सहित टिकट कटने की आशंका वाले विधायकों को साथ आने का खुला ऑफर भी दिया है.
वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी अपने स्तर पर तैयारी में जुटी है. भाजपा की ओर से 29 सितंबर को आठ नामांकन पत्र खरीदे गए थे. अब पार्टी ने नौवां नामांकन पत्र भी खरीद लिया है.
विपक्षी खेमे में सेंधमारी की कवायद भी तेज कर दी
भाजपा की ओर से नौवां पर्चा खरीदे जाने से राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल और बढ़ गई है. पार्टी जहां अपने विधायकों पर निगरानी बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में सेंधमारी की कवायद भी तेज कर दी गई है.
भारतीय जनता पार्टी पिछले राज्यसभा चुनाव में बगावत का सुर बुलंद करने वाले सपा विधायकों में से मनोज पांडे को कैबिनेट मंत्री भी बना चुकी है. इसी तरह के प्रयोग अबकी बार भी दोहराने का प्रयास है. भाजपा ने विपक्षी खेमे में सेंधमारी की कवायद शुरू कर दी है.
उधर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 25 सपा विधायकों के संपर्क में होने का बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है. इसके बाद दोनों खेमों ने अपने-अपने विधायकों की निगरानी और बढ़ा दी है. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सपा तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारती है या नहीं और भाजपा अपने नौवें नामांकन पत्र को लेकर क्या रणनीति अपनाती है.
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