Aaj Ka Mausam: देशभर में मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदल लिया है, जिसने गर्मी के पारंपरिक पैटर्न को पूरी तरह उलट कर रख दिया है. आमतौर पर मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं. उत्तर भारत से लेकर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों तक बारिश, आंधी, तूफान और ओलावृष्टि की घटनाओं ने गर्मी के असर को थाम दिया है. कई इलाकों में तो मौसम इस कदर बिगड़ा है कि लोगों को गर्मी से राहत के साथ-साथ नुकसान और खतरे का सामना भी करना पड़ रहा है.
अगर मौजूदा मौसम प्रणालियों की बात करें तो इसका मुख्य कारण सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है. मध्य पाकिस्तान और उससे सटे इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण के साथ यह पश्चिमी विक्षोभ अभी भी बना हुआ है, जो निचले और ऊपरी वायुमंडलीय स्तरों के बीच सक्रिय है. इसके अलावा, पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में निचले स्तर पर एक ऊपरी-हवाई चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसी तरह छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में भी एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है, जबकि दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश के पास भी एक और सिस्टम बना हुआ है. इन सभी मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के कई हिस्सों में अस्थिर मौसम की स्थिति बनी हुई है.
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मौसम विभाग के अनुसार 7 अप्रैल 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर 7 और 8 अप्रैल को सबसे अधिक देखने को मिलेगा. इसके प्रभाव से मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत में 8 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं. पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में 7 और 8 अप्रैल को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जबकि झारखंड में 5 से 7 अप्रैल के बीच कहीं-कहीं ओले गिर सकते हैं. अगले सात दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे भीषण गर्मी फिलहाल टलती नजर आ रही है.
दिल्ली-एनसीआर का मौसम
दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है. बीते कुछ दिनों से बादल छाए हुए हैं और तेज हवाओं के साथ कई जगहों पर बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है. मौसम विभाग का अनुमान है कि यह स्थिति 8 अप्रैल तक बनी रह सकती है. हालांकि 5 और 6 अप्रैल को मौसम कुछ हद तक साफ रह सकता है और तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, लेकिन इसके बाद 7 और 8 अप्रैल को फिर से बादल छाने और बारिश होने की संभावना है. इस बदलाव ने जहां आम लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है.
यूपी में मौसम
उत्तर प्रदेश में भी मौसम का रुख अस्थिर बना हुआ है. मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. अगले 24 घंटों के दौरान तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है. खासकर 5 अप्रैल को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश दोनों ही हिस्सों में बारिश हो सकती है. विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि 7 अप्रैल को सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों को प्रभावित करेगा, जिसका असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है.
बिहार में बदला मौसम
बिहार में भी मौसम तेजी से बदल रहा है. पटना समेत कई जिलों में तेज हवाएं चल रही हैं और बादल छाए हुए हैं. मौसम विज्ञान केंद्र ने 5 अप्रैल से राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में तेज हवा, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है. 6 और 7 अप्रैल को कुछ जिलों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है. अगले 48 घंटों के दौरान तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. मौसम विभाग के अनुसार 7 अप्रैल को पश्चिमी विक्षोभ का असर यहां भी दिखाई देगा, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण भी मौसम को प्रभावित करेगा.
राजस्थान में मौसम का रौद्र रूप
राजस्थान में भी मौसम का यही बदला हुआ रूप देखने को मिल रहा है. 6 अप्रैल को दोपहर बाद जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में नया और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे तेज आंधी और बारिश की संभावना है. 7 अप्रैल को जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के कई इलाकों में आंधी, ओलावृष्टि और मध्यम से तेज बारिश हो सकती है. 8 अप्रैल को उत्तरी और पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि बाकी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी तैयार फसलों और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखें.
मध्य प्रदेश में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय
मध्य प्रदेश में भी 5 अप्रैल को महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्र में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है. इन इलाकों में तेज हवाओं, गरज-चमक और ओलावृष्टि का खतरा है. 5 से 6 अप्रैल के बीच यह प्रभाव पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों जैसे दतिया, भिंड, रीवा, मऊगंज, अनूपपुर, शहडोल और छिंदवाड़ा तक फैल सकता है. 6 से 7 अप्रैल के दौरान ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्रों में बादलों का असर रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी. हालांकि 7 से 8 अप्रैल के बाद मौसम में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन कुछ इलाकों में वज्रपात का खतरा बना रहेगा.
जम्मू-कश्मीर में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ नजर आ रहा है. यहां मैदानी इलाकों में बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है. बारामूला जैसे क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. मौसम विभाग के अनुसार 5 से 7 अप्रैल तक आंशिक बादल छाए रहेंगे, जबकि 8 और 9 अप्रैल को हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इस दौरान कुछ संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और पत्थर गिरने की घटनाओं का खतरा बना रहेगा. 10 और 11 अप्रैल को भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फबारी संभव है, जबकि 12 से 15 अप्रैल के बीच मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है.
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दक्षिण भारत की बात करें तो यहां भी मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं है. केरल और माहे में 5 से 7 अप्रैल के बीच बारिश की संभावना है, जबकि आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 5 से 8 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी 5 से 8 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. कुछ स्थानों पर तेज हवाएं 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं. इसके अलावा 4 से 6 अप्रैल के बीच तमिलनाडु और केरल के कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है.
देशभर में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कई तरह की चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है. तेज आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं जनजीवन और किसानों के लिए खतरा बन रही हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में सतर्क रहना और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है.


