Ambala-Shamli-Gorakhpur-Siliguri Corridor: देश के हाईवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इनमें अंबाला-शामली, शामली-गोरखपुर और गोरखपुर-सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर आपस में जुड़कर उत्तर भारत से पूर्वी भारत तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क तैयार करेंगे. इससे पंजाब और हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल तक सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें- लोक अदालत से चालान कैसे माफ कराएं? जानें स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रिया
तीन बड़े एक्सप्रेसवे बनेंगे इस नेटवर्क की रीढ़
- अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे
करीब 122 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे अंबाला को शामली से जोड़ेगा. आधिकारिक परियोजना दस्तावेज के अनुसार इसकी लंबाई करीब 120.97 किलोमीटर है और इसका उद्देश्य तेज तथा बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है.
इससे पंजाब और हरियाणा की तरफ से आने वाला ट्रैफिक शामली के रास्ते पूर्वी उत्तर प्रदेश और आगे बिहार-बंगाल की ओर जा सकेगा. रिपोर्टों के मुताबिक अंबाला-शामली के बीच यात्रा का समय करीब 3 घंटे से घटकर लगभग डेढ़ घंटे तक आने का लक्ष्य है. - शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे
यह यूपी के पश्चिमी हिस्से को पूर्वांचल से जोड़ने वाली बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना है. इसके कई पैकेजों के लिए निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. सितंबर 2026 में इसके एक 58.6 किलोमीटर पैकेज के लिए NHAI ने बोली आमंत्रित की है.
रिपोर्टों के अनुसार पूरा कॉरिडोर तैयार होने के बाद शामली से गोरखपुर की यात्रा करीब 7.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य है, जबकि दिल्ली से गोरखपुर की यात्रा लगभग 8 घंटे तक आने का अनुमान बताया गया है. - गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे करीब 526 किलोमीटर लंबा होगा. बिहार और पश्चिम बंगाल के रास्ते यह कॉरिडोर पूर्वी भारत को तेज सड़क कनेक्टिविटी देने में अहम भूमिका निभाएगा. इसके लिए जमीन चिह्नांकन और अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े काम भी आगे बढ़ रहे हैं.
दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर होगा तेज
इन एक्सप्रेसवे और मौजूदा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क के आपस में जुड़ने से दिल्ली-NCR से सिलीगुड़ी तक सड़क संपर्क बेहतर होगा. उपलब्ध रिपोर्टों में मौजूदा करीब 28-32 घंटे के सफर को भविष्य में लगभग 15-16 घंटे तक लाने का अनुमान दिया गया है. वहीं गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर भी मौजूदा करीब 15 घंटे से घटकर लगभग 8 घंटे तक आने का अनुमान है.
किन राज्यों को मिलेगा फायदा?
इस इंटरलिंक्ड नेटवर्क से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को सीधे या कनेक्टिंग एक्सप्रेसवे के जरिए तेज सड़क संपर्क मिलने की बात सामने आई है. दिल्ली-NCR की कनेक्टिविटी शामली के पास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जुड़ सकती है.
दिल्ली के ट्रैफिक पर भी पड़ेगा असर
इस नेटवर्क का एक अहम फायदा यह माना जा रहा है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल की ओर जाने वाले लंबी दूरी के वाहनों को दिल्ली के अंदरूनी हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है. इससे लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक हाई-स्पीड रूट उपलब्ध होगा.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों है खास?
सिलीगुड़ी क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले सड़क नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच तेज संपर्क बनने से पूर्वोत्तर की ओर जाने वाले यातायात को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें- नागपुर से गोंदिया 75 मिनट में, चंद्रपुर का सफर 2 घंटे में, महाराष्ट्र में 3 बड़े एक्सप्रेसवे ने पकड़ी रफ्तार
यानी अंबाला से शुरू होकर शामली और गोरखपुर होते हुए सिलीगुड़ी तक तैयार हो रहा यह इंटरलिंक्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच सड़क कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.


