Jhansi Link Expressway: झांसी लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया अब और तेज होने वाली है. परियोजना के लिए जिले के 49 गांवों में 316.93 हेक्टेयर बची हुई भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए हैं. लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए जिले में कुल 1118.50 हेक्टेयर निजी भूमि की जरूरत है. इसमें से अब तक 997.41 हेक्टेयर यानी 89.16 फीसदी भूमि खरीदी जा चुकी है. हालांकि, करीब 11 फीसदी भूमि अभी बाकी है, जिसके लिए अब अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी.
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चार तहसीलों के 49 गांवों में होगा अधिग्रहण
यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि झांसी सदर तहसील के 10 गांव, मोंठ के 14, टहरौली के 11 और गरौठा तहसील के 14 गांव शामिल हैं. इन सभी 49 गांवों में कुल 316.93 हेक्टेयर अवशेष भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है. यूपीडा ने जिलाधिकारी से नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है.
इंटरचेंज के लिए 199 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन भी प्रस्तावित
परियोजना के चैनेज 35 पर प्रस्तावित इंटरचेंज के निर्माण के लिए भी करीब 199.31 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रस्तावित है. यह भूमि इस्किलबुजुर्ग, नैकेरा और लभेरा गांवों से संबंधित है. इंटरचेंज के निर्माण से एक्सप्रेस-वे की कनेक्टिविटी और आसपास के क्षेत्रों से आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
600 बैनामे हुए, लेकिन सिर्फ 74 का अंतिम भुगतान
भूमि खरीद के साथ-साथ किसानों और अन्य भू-स्वामियों को भुगतान की प्रक्रिया भी चल रही है. हालांकि, गरौठा तहसील में भुगतान की धीमी रफ्तार को लेकर प्रशासन ने नाराजगी जताई है. 29 सितंबर को हुई समीक्षा बैठक में सामने आया कि गरौठा तहसील में एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए 600 बैनामे हो चुके हैं. इनमें से केवल 74 बैनामों से संबंधित पत्रावलियों में अंतिम भुगतान किया जा सका है. यानी भुगतान योग्य बैनामों में महज 12.33 फीसदी मामलों में ही अंतिम भुगतान हुआ है.
तीन दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण
प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर एडीएम वित्त एवं राजस्व पल्लवी मिश्रा ने गरौठा के एसडीएम सुनील कुमार से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है. एडीएम के मुताबिक, पिछले महीने से नियमित अंतराल पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भुगतान संबंधी पत्रावलियों का परीक्षण कर उन्हें भेजने के निर्देश दिए जा रहे हैं. इसके बावजूद गरौठा तहसील में भुगतान की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिली.
अब प्रशासन के सामने एक ओर बची हुई जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर खरीदी जा चुकी जमीन के बैनामों का भुगतान जल्द कराने का दबाव भी है. परियोजना की रफ्तार काफी हद तक इन दोनों प्रक्रियाओं के समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी.
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