Meerut Metro Expansion: मेरठ में मेट्रो नेटवर्क को विस्तार देने की तैयारी तेज हो गई है. शहर के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी मेरठ के आवासीय, शैक्षणिक और मेडिकल हब से जोड़ने के लिए मेरठ मेट्रो फेज-2 और फेज-3 के तहत नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. दोनों चरणों में कुल 19 नए स्टेशन प्रस्तावित हैं. इनमें फेज-2 के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में 13 स्टेशन होंगे, जबकि फेज-3 में 6 स्टेशन बनाए जाने की योजना है. विस्तार पूरा होने के बाद शहर के पुराने बाजारों, घनी आबादी वाले इलाकों, मेडिकल कॉलेज और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय तक मेट्रो की पहुंच आसान होगी.
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शारदापुरी से जागृति विहार तक बनेगा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर
मेरठ मेट्रो फेज-2 के तहत ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को शारदापुरी/श्रद्धापुरी फेज-2 से जागृति विहार विस्तार तक ले जाने की योजना है. करीब 15 किलोमीटर लंबे इस रूट में लगभग 10.7 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 4.3 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड होगा.
इस कॉरिडोर पर 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं.
- शारदापुरी/श्रद्धापुरी फेज-2
- कंकरखेड़ा
- मेरठ कैंट रेलवे स्टेशन
- रजबन बाजार
- बेगमपुल
- बच्चा पार्क
- शाहपीर गेट
- हापुड़ अड्डा चौराहा
- गांधी आश्रम
- मंगल पांडे नगर
- तेजगढ़ी चौराहा
- मेडिकल कॉलेज
- जागृति विहार विस्तार
शहर के पुराने और भीड़भाड़ वाले इलाकों को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर मेरठ की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है.
फेज-3 में CCS यूनिवर्सिटी से गंगानगर तक मेट्रो
मेरठ मेट्रो के फेज-3 में करीब 9 किलोमीटर लंबे रूट पर 6 स्टेशन प्रस्तावित हैं. यह कॉरिडोर CCS यूनिवर्सिटी से बेगमपुल होते हुए गंगानगर की ओर कनेक्टिविटी देगा. इससे गंगानगर, डिफेंस एन्क्लेव और विश्वविद्यालय परिसर के छात्रों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को सेंट्रल मेरठ और नमो भारत नेटवर्क तक बेहतर पहुंच मिलेगी.
मेरठ मेट्रो अभी कहां तक चल रही है?
फिलहाल मेरठ मेट्रो मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक संचालित हो रही है. मौजूदा फेज-1 की कुल लंबाई करीब 23.60 किलोमीटर है. इसमें लगभग 14.8 किलोमीटर एलिवेटेड और 8.8 किलोमीटर अंडरग्राउंड हिस्सा है.
नमो भारत और मेट्रो की मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
मेरठ मेट्रो की सबसे बड़ी खासियत दिल्ली-मेरठ नमो भारत/RRTS कॉरिडोर के साथ इसका इंटीग्रेशन है. लोकल मेट्रो और नमो भारत सेवाओं के बीच यात्रियों को बेहतर इंटरचेंज सुविधा मिलेगी. बेगमपुल और मेरठ कैंट जैसे प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो, नमो भारत और रेलवे नेटवर्क से जुड़ने का फायदा मिलेगा. इससे दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए भी शहर के अलग-अलग हिस्सों से कनेक्टिविटी आसान होगी. एक ही नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) या QR आधारित टिकटिंग व्यवस्था के जरिए दोनों सेवाओं में यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है.
एक ही ट्रैक पर मेट्रो और नमो भारत
दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की खास बात यह है कि मेरठ में नमो भारत और स्थानीय मेट्रो के लिए साझा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे अलग-अलग ट्रैक और सिस्टम विकसित करने की लागत में बड़ी बचत हुई है. इस साझा व्यवस्था से करीब 6,500 करोड़ रुपये की लागत बचत होने का दावा किया गया है.
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मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक आसान होगी पहुंच
फेज-2 और फेज-3 के विस्तार का सीधा फायदा मेरठ के बड़े शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलेगा. लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज और CCS यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख संस्थानों तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर होगी. इसके अलावा बेगमपुल, बच्चा पार्क, हापुड़ अड्डा और रजबन बाजार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क यातायात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है. मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से मेरठ के पुराने शहर, कैंट क्षेत्र, विश्वविद्यालय, मेडिकल हब और बाहरी आवासीय इलाकों के बीच हाई-कैपेसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार होगा. वहीं नमो भारत से कनेक्टिविटी मिलने के बाद मेरठ से दिल्ली तक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए शहर के भीतर और इंटरसिटी सफर का पूरा नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा.


