Uttarakhand News: भारत की बेटियों ने एक बार फिर दुनिया को अपना साहस दिखा दिया. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर जब ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. यह ऐतिहासिक कारनामा सीमा सुरक्षा बल Border Security Force की चार वीरांगनाओं ने कर दिखाया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और मौत जैसी चुनौतियों के बीच तिरंगे का मान बढ़ाया.
BSF के डायमंड जुबली वर्ष और भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू किए गए मिशन वंदे मातरम् ने इतिहास रच दिया. कई दिनों तक बर्फीले तूफानों, खतरनाक रास्तों और ऑक्सीजन की कमी से जूझने के बाद इन महिला जवानों ने एवरेस्ट फतह किया.
सबसे भावुक पल तब आया, जब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर, जहां सांस लेने के लिए भी ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लेना पड़ता है, वहां इन वीरांगनाओं ने बिना ऑक्सीजन मास्क के बैठकर ‘वंदे मातरम’ का गायन किया. जमा देने वाली ठंड और तेज सर्द हवाओं के बीच उनकी आवाज में सिर्फ गीत नहीं, बल्कि पूरे भारत का गर्व गूंज रहा था.
यह पहली बार है जब BSF की महिला जवानों ने एवरेस्ट की चोटी से ‘वंदे मातरम’ गाकर देशभक्ति का ऐसा अद्भुत संदेश दिया. इस ऐतिहासिक टीम में लद्दाख की एम/सीटी कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की एम/सीटी मुनमुन घोष, उत्तराखंड की एम/सीटी राबेका सिंह और कारगिल-लद्दाख की एम/सीटी त्सेरिंग चोरोल शामिल रहीं. देश के अलग-अलग कोनों से आने वाली ये बेटियां एकता में विविधता की सच्ची तस्वीर बनकर सामने आईं.
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इन चारों वीरांगनाओं ने साबित कर दिया कि हौसलों की उड़ान के आगे दुनिया की कोई ऊंचाई बड़ी नहीं होती. यह मिशन सिर्फ एवरेस्ट फतह करने की कहानी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, देशभक्ति, साहस और भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रतीक बन गया है. आज पूरा देश इन बेटियों को सलाम कर रहा है, जिन्होंने बर्फ से ढकी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भारत माता का गौरव गूंजा दिया.
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