प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में पैर पसार चुके ‘गन कल्चर’ और रसूखदारों के बढ़ते दबदबे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने सूबे के चर्चित बाहुबलियों और रसूखदार राजनेताओं की पूरी ‘आपराधिक कुंडली’ राज्य सरकार से तलब कर ली है. हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बाहुबलियों को मिले शस्त्र लाइसेंसों और उन्हें मुहैया कराई गई सरकारी सुरक्षा की गहन जांच की जाए.
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने यूपी सरकार को 26 मई 2026 तक इस संबंध में एक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है.
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अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, देनी होगी ‘लिखित अंडरटेकिंग’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि संबंधित जिलों के पुलिस कप्तान (SP/SSP) और कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त (CP) को इस रिपोर्ट के साथ एक लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी. इस अंडरटेकिंग में अफसरों को यह प्रमाणित करना होगा कि बाहुबलियों से जुड़ी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है. हाई कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई भी तथ्य छिपाया हुआ पाया गया, तो इसके लिए संबंधित पुलिस अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला संतकबीरनगर के निवासी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर द्वारा दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने में नियमों और प्रक्रियाओं की जमकर अनदेखी की जा रही है. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रदेश भर में जारी किए गए हथियारों के लाइसेंसों और दागी छवि वाले लोगों को मिली सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए.
चौंकाने वाले आंकड़े
6 हजार से ज्यादा दागी लोगों के पास हथियार
सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं, प्रदेश में इस समय कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस सक्रिय हैं. कुल लाइसेंसधारकों में से 6,062 ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. वर्तमान में 23,000 से अधिक नए शस्त्र लाइसेंस के आवेदन प्रक्रिया में हैं.करीब 20,960 ऐसे परिवार हैं, जिनके पास एक से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं.
इन आंकड़ों पर गहरी हैरानी जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में स्थानीय पुलिस प्रभावशाली और रसूखदार लोगों की सही जानकारी छिपा लेती है, इसलिए व्यवस्था में पारदर्शिता लाना बेहद जरूरी है.
कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज में बढ़ते हथियारों के चलन पर बेहद गंभीर और तल्ख टिप्पणी की. हाई कोर्ट ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है. अगर हथियार आत्मरक्षा के बजाय डराने-धमकाने और अपना दबदबा कायम करने का जरिया बन जाएं, तो वे सुरक्षा नहीं बल्कि खौफ पैदा करते हैं. ऐसा समाज जहां हथियारबंद लोग अपनी ताकत के दम पर प्रभाव कायम करने की कोशिश करें, वह समाज न तो कभी शांतिपूर्ण हो सकता है और न ही सुरक्षित.
इन रसूखदारों और बाहुबलियों पर कसी गाज
हाई कोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न जोनों नोएडा, मेरठ, आगरा, बरेली, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर के कई चर्चित नामों की सूची तैयार कर उनकी पूरी जानकारी मांगी है. इस सूची में शामिल प्रमुख नाम हैं, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, अब्बास अंसारी, विजय मिश्रा, मदन भद्दो, हाजी याकूब कुरैशी, राजन तिवारी समेत कई लोगों को नाम है.
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अदालत ने सरकार से साफ तौर पर पूछा है कि इन लोगों को वर्तमान में किस श्रेणी (Category) की सुरक्षा मिली हुई है, इनकी सुरक्षा में कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं और इनके व इनके करीबियों के पास कुल कितने शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं. अब सभी की नजरें 26 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब सरकार को इन सभी ५० से अधिक बाहुबलियों का पूरा ब्योरा अदालत के सामने टेबल करना होगा.
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