Ayodhya News: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा पीएम-उष योजना के अंतर्गत आयोजित “एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग एंड एनालिसिस” विषयक एक सप्ताहीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ केंद्रीय उपकरण सुविधा ( सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी) भवन में हुआ. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 से 5 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वायु गुणवत्ता निगरानी, प्रदूषण विश्लेषण तथा आधुनिक पर्यावरणीय उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है. ऐसे में वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को न केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करेगा बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील भी बनाएगा.
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. अमित मिश्र, ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए भारत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरणीय निगरानी की आधुनिक तकनीकों तथा इस क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं शोध अवसरों पर विस्तृत प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय डेटा की गुणवत्ता और उसकी वैज्ञानिक व्याख्या सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों और शोधार्थियों में अत्यधिक उत्साह देखने को मिला. आयोजकों ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि प्रयोगशाला आधारित गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए केवल 50 प्रतिभागियों का चयन किया गया. आवेदनकर्ताओं की बड़ी संख्या इस प्रकार के कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बढ़ती मांग और पर्यावरणीय क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाती है.
इस अवसर पर विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पर्यावरण विज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी तथा यह उत्तर प्रदेश का पहला स्वतंत्र स्नातकोत्तर शिक्षण एवं शोध विभाग है. विभाग पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण, वायु, जल एवं मृदा गुणवत्ता निगरानी, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन तथा पारिस्थितिकी संबंधी अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
विभाग में वायु, जल एवं मृदा विश्लेषण हेतु अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं तथा विभाग के शिक्षकों एवं शोधार्थियों द्वारा 250 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जा चुके हैं. विभाग कोडी एस टी, यूजीसी, एमओईफ़सीसी, सीएसआईआर, एआईसीटीई, यूपीसीएसटी, एमओईएस, यूपीपीसीबी सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं से शोध परियोजनाएं प्राप्त हुई हैं. विभाग समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन करता रहा है.
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विनोद कुमार चौधरी एवं डॉ. महिमा चौरसिया ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पीएम पीएम, पीएम, एनओ की निगरानी, एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) निर्धारण, गुणवत्ता आश्वासन एवं नियंत्रण (क्यूए/क्यूसी), उपकरणों के अंशांकन, डेटा विश्लेषण तथा रिपोर्ट लेखन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को आधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों के संचालन का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त होगा.
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कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन, आमंत्रित विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करेगा तथा उन्हें पर्यावरणीय अनुसंधान एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा.


