नई दिल्ली: क्लीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) को बढ़ावा देने की दिशा में दिल्ली सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. राजधानी दिल्ली को जल्द ही अपना पहला ‘सोलर ट्री’ (Solar Tree) मिलने वाला है. सरकार की योजना के मुताबिक, इस अनोखे सोलर ट्री को सबसे पहले दिल्ली सचिवालय की बिल्डिंग में लगाया जाएगा, जहां मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी बैठते हैं. सचिवालय में इस प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद, सरकार की मुहिम के तहत इसे पूरी दिल्ली में विस्तार दिया जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार का बिजली विभाग इस योजना पर तेजी से काम कर रहा है.
क्या होता है ‘सोलर ट्री’?
यह एक विशेष प्रकार का फोटोवोल्टिक (PV) पैनल सिस्टम होता है, जिसे मेटल फ्रेम, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों की मदद से हूबहू एक पेड़ जैसी आकृति (स्ट्रक्चर) में ढाला जाता है. इसकी ‘शाखाओं’ पर लगे पैनल सूरज की रोशनी को सोखकर उसे बिजली में बदलते हैं. इस बिजली को स्ट्रक्चर के निचले हिस्से (बेस) में लगी बैटरी में स्टोर किया जाता है, जिसका इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जा सकता है.
सामान्य सोलर सिस्टम से कैसे है अलग?
आमतौर पर छतों या मैदानों में लगने वाले पारंपरिक सोलर सिस्टम के लिए बहुत बड़े और चौड़े हिस्से की जरूरत होती है. इसके विपरीत, सोलर ट्री वर्टिकल स्पेस (खड़ी जगह) का इस्तेमाल करता है. इसमें बीच में एक मजबूत धातु का तना (ट्रंक) होता है, जिससे जुड़ी शाखाओं को सटीक कोण (Angle) पर सेट किया जाता है ताकि उन पर सोलर पैनल फिट हो सकें.
दिल्ली के लिए क्यों वरदान है सोलर ट्री? (इसके मुख्य फायदे)
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में जहां जमीनों की कमी है, वहां यह वर्टिकल डिजाइन वरदान साबित होगा. यह जमीन पर बेहद कम जगह घेरकर भी कई हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनलों को संभाल सकता है.
सन ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी (Sun Tracking Technology)
अधिकारियों के मुताबिक, इसके कुछ एडवांस्ड डिजाइनों पर भी चर्चा चल रही है. इनमें स्मार्ट मैकेनिकल पार्ट्स लगे होंगे, जिससे इसके पैनल सूरज की दिशा के साथ-साथ खुद ब खुद घूम सकेंगे (स्मार्ट रोटेशन). दिनभर सूरज को ट्रैक करने की इस खूबी से यह सामान्य से कहीं अधिक बिजली पैदा कर पाएगा. दुनिया के कई आधुनिक शहरों की तर्ज पर अब दिल्ली भी इस तकनीक को अपनाने जा रही है. सचिवालय से शुरू हो रही यह मुहिम आने वाले दिनों में दिल्ली के पार्कों, सरकारी परिसरों और प्रमुख चौराहों पर भी देखने को मिल सकती है.


