करीब छह वर्षों से अधिक समय तक बंद रहने के बाद सिक्किम के नाथू ला दर्रे से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू हो गया है. रविवार सुबह से व्यापारिक गतिविधियां बहाल होने के साथ ही इसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है.
सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने से पहले भारत और चीन के अधिकारियों ने नो मैन्स लैंड (No Man’s Land) में बैठक की. चीनी प्रतिनिधिमंडल में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (Tibet Autonomous Region) के प्रशासनिक अधिकारी तथा वाणिज्य और सीमा व्यापार विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे.
छह साल बाद फिर खुला व्यापारिक मार्ग
नाथू ला के माध्यम से भारत-चीन सीमा व्यापार 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान स्थगित कर दिया गया था. इसके बाद से यह मार्ग बंद था.
अब दोनों देशों की सहमति के बाद व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी गई हैं, जिससे सीमावर्ती व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है.
2006 में दोबारा शुरू हुआ था व्यापार
भारत और चीन के बीच 1962 के युद्ध के बाद नाथू ला मार्ग से व्यापार बंद हो गया था.
बाद में वर्ष 2006 में इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग को औपचारिक रूप से फिर से खोला गया और इसके बाद 2020 तक व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहा.
कोविड-19 महामारी के कारण इसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था.
सप्ताह में चार दिन होगा व्यापार
अधिकारियों के अनुसार, सीमा व्यापार सोमवार से गुरुवार तक संचालित किया जाएगा.
नाथू ला गेट भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे खोला जाएगा. प्रत्येक पंजीकृत व्यापारी को प्रतिदिन अधिकतम 2 लाख रुपये तक का व्यापार करने की अनुमति होगी.
आयात-निर्यात नियमों में कोई बदलाव नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्वीकृत आयात एवं निर्यात वस्तुओं की सूची और मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
व्यापार पहले से लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही संचालित होगा.
द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत
नाथू ला दर्रे से सीमा व्यापार की बहाली को भारत और चीन के बीच संवाद और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है.


