नई दिल्ली: 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने युवा पीढ़ी के बीच चुनावी साक्षरता बढ़ाने के लिए अपना outreach अभियान तेज किया है. आयोग का फोकस खास तौर पर Gen Z और Gen Alpha तक पहुंच बनाने पर है, ताकि युवाओं को चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदाता पंजीकरण की जानकारी दी जा सके. इसके लिए देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्वाचन साक्षरता अभियान से जोड़ने की योजना है.
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, देश की 4,123 विधानसभा सीटों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों तक पहुंच बनाई जाएगी. इस अभियान का लक्ष्य केवल भविष्य के मतदाताओं को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आगे चलकर चुनावी जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करना भी है.
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से तबाही, 105 भारतीयों समेत 384 यात्री लापता
18 से 26 वर्ष की उम्र में 14.78 करोड़ लोग
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, देश में 18 से 26 वर्ष आयु वर्ग में करीब 14.78 करोड़ लोग हैं. इनमें 7.98 करोड़ पुरुष, 6.79 करोड़ महिलाएं और करीब 9,000 तृतीय लिंग के लोग शामिल हैं. इतने बड़े युवा वर्ग को देखते हुए आयोग चुनावी साक्षरता और informed democratic participation पर विशेष जोर दे रहा है.
आयोग का उद्देश्य युवाओं को चुनाव की प्रक्रिया को समझने के साथ अपने मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है. इसके लिए educational institutions को लगातार संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.
50 हजार Electoral Literacy Clubs बनाने की योजना
इस अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा 50,000 Electoral Literacy Clubs यानी ELCs का नेटवर्क तैयार करना है. अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 ELC के हिसाब से यह संख्या तय की गई है. इन क्लबों के जरिए विद्यार्थियों और युवाओं को चुनावी प्रक्रिया तथा लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.
ELC का उद्देश्य युवाओं को केवल election-related जानकारी देना नहीं है. इन्हें ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां युवा चुनावी साक्षरता गतिविधियों में हिस्सा ले सकें और आगे अपने परिवार तथा समुदाय में भी factual electoral awareness फैलाने में भूमिका निभा सकें.
15 लाख स्कूलों और 70 हजार कॉलेजों तक पहुंचेगा अभियान
निर्वाचन आयोग ने अपने इस outreach के लिए देश के विशाल education ecosystem को आधार बनाया है. अभियान के तहत लगभग 15 लाख स्कूलों में कक्षा 9 से 12 के छात्रों तक पहुंच बनाने की योजना है. इसके अलावा करीब 70,000 educational institutions और 1,400 से अधिक universities को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.
PIB के अनुसार, देश के लगभग 15 लाख स्कूलों में करीब 25 करोड़ विद्यार्थी और एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं. उच्च शिक्षा क्षेत्र में करीब 1,500 विश्वविद्यालय और लगभग 70,000 शिक्षण संस्थान हैं, जहां अनुमानित 4.33 करोड़ विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. इसी institutional network के जरिए ELC 2.0 को देशभर में मजबूत करने की योजना है.
2018 में शुरू हुए थे Electoral Literacy Clubs
निर्वाचन साक्षरता क्लबों की शुरुआत 2018 में SVEEP यानी Systematic Voters’ Education and Electoral Participation programme के तहत की गई थी. इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका तथा कार्यप्रणाली से परिचित कराना था.
अब बदलते communication ecosystem और digital platforms के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आयोग ने इन क्लबों को नए स्वरूप में पेश किया है.
ELC 2.0 में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर
निर्वाचन आयोग ने ELC 2.0 को ज्यादा structured और digitally enabled framework के रूप में तैयार किया है. आयोग के मुताबिक, इसका उद्देश्य educational institutions में year-round activities चलाना और युवाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखना है.
ELC 2.0 को ECINet के digital platform से भी जोड़ा जाएगा. इसके लिए dedicated ELC portal का इस्तेमाल करते हुए देशभर के clubs का एक streamlined network तैयार करने की योजना है. इसके जरिए युवाओं को voter registration से लेकर polling और counting तक चुनावी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों की जानकारी दी जाएगी.
सिर्फ वोटर नहीं, जागरूकता अभियान के लीडर भी बनेंगे युवा
आयोग का नया approach युवाओं को सिर्फ future voters के रूप में देखने तक सीमित नहीं है. लक्ष्य यह है कि वे electoral literacy के जरिए अपने आसपास भी जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभाएं.
PIB के मुताबिक, ELC 2.0 का उद्देश्य युवाओं को informed democratic participation के ambassadors के तौर पर प्रोत्साहित करना है. यानी वे अपने परिवार, educational institutions और community में चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ी तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकते हैं.
आयोग के नए ELC framework का tagline “Learn Democracy. Lead Democracy.” रखा गया है, जो युवाओं को लोकतंत्र को समझने के साथ उसमें meaningful participation के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है.
2029 लोकसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है यह अभियान
2029 का लोकसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने युवा मतदाताओं के बीच लंबे समय तक चलने वाली electoral literacy पर काम शुरू कर दिया है. इसका मकसद चुनाव के समय अचानक awareness campaign चलाने के बजाय educational institutions में लगातार जागरूकता गतिविधियां विकसित करना है.
इस approach के तहत students को voter registration, मतदान, counting और चुनावी प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी पहले से देने की कोशिश होगी. साथ ही digital tools और ECINet के जरिए युवाओं को चुनाव संबंधी official information तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.
इस तरह 50 हजार ELC और ELC 2.0 framework आने वाले वर्षों में युवा मतदाताओं के साथ निर्वाचन आयोग के continuous engagement का आधार बन सकता है. इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन क्लबों की गतिविधियां देशभर के educational institutions में किस स्तर तक नियमित और प्रभावी ढंग से लागू होती हैं.


