Greater Noida Traffic Plan: ग्रेटर नोएडा में बढ़ती औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने की योजना पर काम शुरू किया है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव है.
इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ कनेक्टिविटी बेहतर करना नहीं है, बल्कि भारी वाहनों के कारण शहर की सड़कों पर बनने वाले दबाव को भी कम करना है. प्रस्ताव लागू होने के बाद औद्योगिक क्षेत्रों, गंगा एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब और जेवर एयरपोर्ट के बीच आवागमन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है.
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हापुड़ बाईपास तक बनेगी चौड़ी सड़क
GNIDA ने ग्रेटर नोएडा की मौजूदा कनेक्टिविटी को हापुड़ बाईपास तक आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इसके लिए करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क विकसित करने की योजना है. प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा कनेक्टिविटी को लगभग 15 किलोमीटर तक बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा.
इस सड़क के बनने से नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. अधिकारियों के मुताबिक दोनों क्षेत्रों के बीच सफर का समय करीब 30 से 45 मिनट तक रह सकता है. इससे आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलने की संभावना है.
लॉजिस्टिक्स हब से जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड
योजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और जेवर एयरपोर्ट के बीच छह लेन की एलिवेटेड रोड है. प्रस्तावित कॉरिडोर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर विकसित करने की योजना है.
इस सड़क का प्रमुख इस्तेमाल मालवाहक वाहनों के लिए किया जाएगा. इसका उद्देश्य मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले माल को सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाना है. इससे माल ढुलाई के समय में कमी आने और भारी वाहनों की आवाजाही को शहर की सामान्य यातायात व्यवस्था से अलग करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
फ्रेट ट्रैफिक का दबाव होगा कम
ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक गतिविधियां और लॉजिस्टिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सामान्य यातायात पर भी दबाव बढ़ने की संभावना रहती है.
इसी को ध्यान में रखते हुए माल और यात्री वाहनों के लिए अलग-अलग मार्ग विकसित करने की योजना बनाई गई है. अगर प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार होते हैं, तो भारी वाहनों को शहर के सामान्य यातायात से अलग रूट मिल सकेगा. इससे यात्री वाहनों की आवाजाही अपेक्षाकृत सुगम बनाने में मदद मिल सकती है.
मास्टर प्लान 2041 में होगा बदलाव
ये प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर की बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक सड़क नेटवर्क को तैयार करना और फ्रेट ट्रैफिक तथा यात्री यातायात को अलग करना है.
इस संबंध में सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक हुई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.
GNIDA के अनुसार मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की प्रमुख आगामी परियोजनाओं में शामिल हैं. इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी मजबूत
ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र में पहले से ही कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं. जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आसपास विकसित हो रही औद्योगिक गतिविधियों के कारण सड़क कनेक्टिविटी की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है. गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर संपर्क इस पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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प्रस्तावित 105 मीटर चौड़ी सड़क और छह लेन की एलिवेटेड रोड इसी व्यापक कनेक्टिविटी नेटवर्क का हिस्सा हैं. इससे ग्रेटर नोएडा, गंगा एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब और जेवर एयरपोर्ट के बीच आवागमन को नई दिशा मिल सकती है.
फिलहाल ये योजनाएं प्रस्ताव के स्तर पर हैं और इन्हें मास्टर प्लान में बदलाव के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. इनके क्रियान्वयन के बाद ग्रेटर नोएडा में माल ढुलाई और यात्री यातायात के लिए अधिक व्यवस्थित सड़क नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है.


