Delhi Elevated Corridor: मध्य और नई दिल्ली से बाहरी व पश्चिमी दिल्ली की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की योजना तैयार हो रही है. दिल्ली सरकार ने रानी झांसी रोड टी-पॉइंट से पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक करीब 7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड के विस्तृत अध्ययन को प्रशासनिक और व्यय मंजूरी दे दी है. इस अध्ययन पर करीब 3.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. लोक निर्माण विभाग (PWD) इस परियोजना का विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन कराने के लिए परामर्श सेवा लेगा. अध्ययन के आधार पर तय होगा कि प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को किस डिजाइन और स्वरूप में विकसित किया जा सकता है.
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न्यू रोहतक रोड के जाम से मिलेगी राहत
रानी झांसी रोड टी-पॉइंट से पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक जाने वाला न्यू रोहतक रोड दिल्ली के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है. इस रूट पर कई प्रमुख चौराहे और लाल बत्तियां होने के कारण पीक आवर्स में यातायात दबाव बढ़ जाता है. सामान्य स्थिति में जिस दूरी को करीब 10 मिनट में तय किया जा सकता है, उसमें कई बार 25 से 30 मिनट लग जाते हैं. भारी जाम की स्थिति में यह समय करीब 45 मिनट तक पहुंच जाता है. इसी समस्या को देखते हुए पूरे मार्ग को एलिवेटेड करने की संभावना का अध्ययन कराया जा रहा है.
- 24 घंटे होगा ट्रैफिक सर्वे, फिर बनेगी DPR
- 24 घंटे और पूरे सप्ताह यातायात सर्वेक्षण
- संभावित एलाइन्मेंट का अध्ययन
- प्रारंभिक इंजीनियरिंग जांच
- अलग-अलग डिजाइन विकल्पों का मूल्यांकन
- परियोजना की अनुमानित लागत
- यातायात सुधार के वैकल्पिक विकल्प
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करना
इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद यह तय किया जाएगा कि 7 किलोमीटर के प्रस्तावित एलिवेटेड मार्ग को किस तरीके से बनाया जाना व्यावहारिक और आर्थिक रूप से उचित होगा.
रास्ते में पड़ती हैं 6 बड़ी लाल बत्तियां
- कमल टी-पॉइंट/लिबर्टी सिनेमा
- आनंद पर्वत
- दया बस्ती/सराय रोहिला कट
- इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन मोड़
- अशोक पार्क मेन
- पंजाबी बाग चौक/रिंग रोड क्रॉसिंग
इन चौराहों पर बार-बार रुकने के कारण वाहन चालकों को जाम का सामना करना पड़ता है. एलिवेटेड कॉरिडोर बनने की स्थिति में मुख्य यातायात को ऊपर से निकालने का विकल्प मिल सकता है, जिससे नीचे के चौराहों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.
पहले सिर्फ जखीरा-करमपुरा के बीच था प्रस्ताव
इस कॉरिडोर को लेकर पहले भी योजना सामने आ चुकी है. वर्ष 2024 के एक प्रस्ताव में जखीरा और करमपुरा फ्लाईओवर को जोड़ने वाले करीब 2.2 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड मार्ग की जरूरत बताई गई थी. हालांकि, मौजूदा प्रस्ताव का दायरा उससे काफी बड़ा है. अब सरकार रानी झांसी रोड टी-पॉइंट से आनंद पर्वत और जखीरा होते हुए पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक पूरे करीब 7 किलोमीटर मार्ग को एलिवेटेड करने की संभावना पर अध्ययन करा रही है. यानी पुरानी योजना के मुकाबले नए प्रस्ताव में कॉरिडोर का दायरा कई गुना बढ़ गया है.
इन इलाकों को भी मिल सकती है बड़ी राहत
अगर परियोजना अध्ययन के बाद स्वीकृत होकर जमीन पर उतरती है तो न्यू रोहतक रोड और आसपास के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है. इसका लाभ मुख्य रूप से आनंद पर्वत, जखीरा, करमपुरा, मोती नगर, पंजाबी बाग, न्यू मोती नगर, नारंग कॉलोनी, चंदर नगर, जनकपुरी और उत्तम नगर समेत आसपास के इलाकों को मिल सकता है. एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्देश्य मुख्य मार्ग के यातायात को सिग्नल और प्रमुख चौराहों से अलग करना होगा, जिससे लंबे समय से जाम झेल रहे इस रूट पर यात्रा का समय कम किया जा सके.
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अभी निर्माण नहीं, पहले होगी व्यवहार्यता की जांच
फिलहाल सरकार ने एलिवेटेड रोड के निर्माण को अंतिम मंजूरी नहीं दी है. मौजूदा आदेश विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन के लिए प्रशासनिक और व्यय मंजूरी से जुड़ा है. अध्ययन और DPR के आधार पर परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, यातायात लाभ और डिजाइन विकल्पों का आकलन किया जाएगा. इसके बाद ही निर्माण को लेकर अगला फैसला होगा. अगर अध्ययन में परियोजना व्यवहार्य पाई जाती है और निर्माण को मंजूरी मिलती है, तो रानी झांसी रोड से पंजाबी बाग तक का यह कॉरिडोर दिल्ली के सबसे अहम यातायात सुधार प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है.


