भोपाल: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. केंद्रीय कैबिनेट ने बिलासपुर से कटनी तक 367 किलोमीटर लंबे रेलवे सेक्शन को 4 लेन यानी चार लाइन में विकसित करने की मंजूरी दे दी है. इस परियोजना पर करीब ₹6,528 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. रेलवे लाइन के विस्तार से यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी आसान होने की उम्मीद है.
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केंद्रीय कैबिनेट ने देश के प्रमुख और व्यस्त रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए 7 हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर को 4-लेन करने की मंजूरी दी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में इसकी जानकारी दी.
बिलासपुर से कटनी तक बढ़ेगी रेल क्षमता
रेल मंत्री के मुताबिक, बिलासपुर से पेंड्रा होते हुए कटनी की दिशा में मौजूदा रेलवे लाइन के कुछ हिस्सों में तीन लाइनें हैं, जबकि कई हिस्से अभी डबल लाइन वाले हैं. अब पूरे बिलासपुर-कटनी सेक्शन को चार लाइन में विकसित करने की योजना है. इससे इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा कंजेशन को कम करने में मदद मिलेगी.
ज्यादा ट्रेनें चलेंगी, कम होगा इंतजार
चार लाइन होने का सबसे बड़ा फायदा रेल ट्रैफिक की क्षमता बढ़ने के रूप में मिलेगा. फिलहाल किसी तेज एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन को निकालने के लिए कई बार दूसरी ट्रेन को स्टेशन या लूप लाइन पर रोकना पड़ता है. अतिरिक्त ट्रैक बनने के बाद ऐसी स्थिति कम हो सकती है.
इससे रेलवे को एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, यात्री और मालगाड़ियों को बेहतर तरीके से चलाने में सुविधा मिलेगी.
माल ढुलाई को भी मिलेगा बड़ा फायदा
बिलासपुर-कटनी रूट छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लिए माल ढुलाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. चार लाइन का नेटवर्क बनने से मालगाड़ियों की आवाजाही की क्षमता बढ़ सकती है. इससे कोयला, खनिज और अन्य औद्योगिक सामान को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में रेलवे की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है.
रेल मंत्री ने छत्तीसगढ़ में रेल परियोजनाओं के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आर्थिक और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. पिछले वर्षों में राज्य में कई नई रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.
MP और छत्तीसगढ़ दोनों को फायदा
बिलासपुर-कटनी रेलवे सेक्शन के 4-लेन होने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है. ज्यादा ट्रेनों के संचालन से यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं, जबकि माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने से उद्योग और व्यापार को भी फायदा हो सकता है.
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यानी आने वाले समय में बिलासपुर से कटनी तक का रेल सफर ज्यादा सुगम होगा और इस व्यस्त रूट पर ट्रेनों की रफ्तार व क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं.


