मुरादाबाद: मुरादाबाद से गाजियाबाद के बीच रेल सफर आने वाले समय में बदलने वाला है. रेलवे यहां तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि नई लाइन को मुरादाबाद और हापुड़ के मौजूदा व्यस्त स्टेशनों से अलग बाईपास रूट से निकालने की योजना है. इस नए रूट पर न्यू मुरादाबाद और न्यू हापुड़ नाम से दो नए स्टेशन बनाए जाने की तैयारी है. मुरादाबाद-गाजियाबाद के बीच करीब 141 किलोमीटर हिस्से का फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा हो चुका है और दोनों नए स्टेशनों के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है.
यह भी पढ़ें- पूर्वांचल के रेल सफर में बड़ा बदलाव, गाजीपुर में शुरू हुई तीसरी लाइन की तैयारी
क्यों जरूरी पड़ी नई रेल लाइन?
मुरादाबाद से गाजियाबाद के बीच रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का दबाव काफी ज्यादा है. गाजियाबाद-सीतापुर रेलखंड में मौजूदा लाइन की क्षमता का इस्तेमाल करीब 168 प्रतिशत तक हो रहा है. रेलवे के अनुमान के मुताबिक, अगर नई लाइन नहीं बनी तो यह दबाव बढ़कर 207 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
ऐसे में तीसरी और चौथी लाइन बनने से ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी. खासकर उन ट्रेनों और मालगाड़ियों को मौजूदा व्यस्त स्टेशनों से अलग रूट देने में मदद मिलेगी, जिन्हें बाईपास से चलाया जा सकता है.
मुरादाबाद और हापुड़ में बनेंगे नए स्टेशन
परियोजना के तहत मुरादाबाद और हापुड़ के व्यस्त स्टेशनों को बाईपास करने की योजना है. इसके लिए न्यू मुरादाबाद और न्यू हापुड़ स्टेशन विकसित किए जाएंगे. मुरादाबाद के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि मुरादाबाद-गाजियाबाद के बीच फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा हो चुका है और दोनों नए स्टेशनों के लिए स्थान चिह्नित कर लिया गया है. इसका मतलब यह है कि नई लाइन पर चलने वाली ट्रेनों के लिए एक अलग कॉरिडोर तैयार होगा, जबकि मौजूदा स्टेशन से यात्री ट्रेनों का संचालन जारी रखा जा सकेगा.
सात व्यस्त स्टेशन होंगे बाईपास
पूरी परियोजना में हापुड़, सिंभावली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर जैसे व्यस्त स्टेशनों को बाईपास करने की योजना बनाई गई है. इन बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं. इससे रेलवे को मौजूदा स्टेशनों पर ट्रेनों का दबाव कम करने और अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.
14,926 करोड़ रुपये की है पूरी परियोजना
केंद्र सरकार ने अप्रैल में गाजियाबाद-सीतापुर के बीच 403 किलोमीटर लंबी तीसरी-चौथी लाइन परियोजना को मंजूरी दी थी. इस पर करीब 14,926 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. परियोजना के दायरे में गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर समेत नौ जिले शामिल हैं. पूरी परियोजना के तहत कुल 859 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाना है.
मालगाड़ियों को भी मिलेगा फायदा
नई लाइन का फायदा सिर्फ यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा. बाईपास रूट बनने से मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी. रेलवे को परियोजना पूरी होने के बाद सालाना करीब 35.72 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की उम्मीद है. साथ ही सड़क के मुकाबले हर साल करीब 2,877 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचने का अनुमान है.
यह भी पढ़ें- Dhanraj Nathwani: कौन हैं धनराज नथवानी, जिन्हें अखिलेश यादव ने बनाया सपा का दूसरा राज्यसभा उम्मीदवार
करीब 994 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण
परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है. गाजियाबाद-मुरादाबाद, मुरादाबाद-रोजा और रोजा-सीतापुर के करीब 402.78 किलोमीटर हिस्से को 2025 में विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया गया था. इसके लिए नौ जिलों में करीब 994.07 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचना जारी की जा चुकी है. अब मुरादाबाद-गाजियाबाद हिस्से में फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा होने के बाद न्यू मुरादाबाद और न्यू हापुड़ स्टेशन की तस्वीर भी साफ हो गई है. आने वाले समय में नई लाइन का निर्माण शुरू होने के साथ इस पूरे रेल रूट का संचालन ढांचा बदल सकता है.


