Amritsar Jamnagar Expressway: देश के सबसे बड़े आर्थिक गलियारों में शामिल अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे उत्तर भारत को पश्चिमी भारत के औद्योगिक और बंदरगाह क्षेत्रों से जोड़ने जा रहा है. करीब 1,257 किलोमीटर लंबे इस छह लेन वाले आर्थिक गलियारे पर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यह कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरता है और कई प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली से भी गुजरात तक तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है.
अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है. अलग-अलग पैकेज और हिस्सों के खुलने के साथ इसकी कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है. राजस्थान में इसका करीब 637 किलोमीटर हिस्सा आता है.
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दिल्ली से जामनगर का सफर हो सकता है 15-16 घंटे
फिलहाल दिल्ली से जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद होते हुए जामनगर जाने में रूट के आधार पर करीब 24 से 26 घंटे तक लग सकते हैं. अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर और इससे जुड़े एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने पर यात्रा का समय घटकर करीब 15-16 घंटे तक आने का अनुमान है. दिल्ली से इस कॉरिडोर तक पहुंचने के लिए कई विकल्प मौजूद होंगे. यात्री KMP एक्सप्रेसवे, NH-44, वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे के जरिए सिरसा-डबवाली क्षेत्र से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पर पहुंच सकते हैं.
इसके अलावा दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और उससे जुड़े लिंक के जरिए पंजाब की तरफ से भी इस कॉरिडोर तक पहुंच बनाई जा सकती है.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ाव
अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर की एक खासियत इसका दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए भी यात्री और मालवाहक वाहन राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर से जुड़ सकते हैं. जयपुर-पचपदरा और जोधपुर क्षेत्र में बनने वाले लिंक से इस नेटवर्क को पश्चिमी राजस्थान और गुजरात की तरफ बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है.
पंजाब में 155 KM, हरियाणा में 85 KM का हिस्सा
अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के कई महत्वपूर्ण शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है.
- पंजाब: करीब 155 किलोमीटर का हिस्सा कपूरथला के टिब्बा क्षेत्र से शुरू होकर मोगा, धर्मकोट, बठिंडा और संगत कलां की तरफ जाता है.
- हरियाणा: करीब 85 किलोमीटर का हिस्सा मंडी डबवाली और सिरसा क्षेत्र से होकर चौटाला तक जाता है.
- राजस्थान: करीब 637 किलोमीटर का सबसे लंबा हिस्सा हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचौर और जालोर से गुजरता है.
- गुजरात: करीब 380 किलोमीटर का हिस्सा थराद, वासरदा, राधनपुर, संतलपुर और मालिया होते हुए जामनगर तक जाता है.
917 KM हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
इस आर्थिक गलियारे का करीब 917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जा रहा है. राजस्थान में हनुमानगढ़ से गुजरात सीमा तक का बड़ा हिस्सा भी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है. एक्सप्रेसवे पर अधिकतम डिजाइन/अनुमत गति करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखे जाने की बात कही गई है. हालांकि वास्तविक यात्रा गति ट्रैफिक, मौसम, इंटरचेंज और नियमों पर निर्भर करेगी.
तीन बड़ी रिफाइनरियों को जोड़ता है कॉरिडोर
अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर का महत्व सिर्फ यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं है. यह देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और पेट्रोलियम केंद्रों को भी जोड़ता है. कॉरिडोर के जरिए बठिंडा की HMEL रिफाइनरी, राजस्थान के बाड़मेर की HPCL रिफाइनरी और गुजरात के जामनगर के रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के बीच बेहतर लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है. इसके अलावा गुजरात के कांडला और मुंद्रा पोर्ट तक राजस्थान, पंजाब और हरियाणा से माल पहुंचाने में समय और परिवहन लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
बीकानेर के भुजिया से जोधपुर के हस्तशिल्प तक को फायदा
एक्सप्रेसवे के जरिए राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों के उत्पादों को गुजरात के बंदरगाहों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. बीकानेर के खाद्य उत्पाद, जोधपुर के हस्तशिल्प और जालोर के ग्रेनाइट जैसे उत्पादों को कांडला, मुंद्रा और जामनगर क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए बेहतर
सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे उत्तर भारत और पश्चिमी तट के बीच माल ढुलाई का समय घटाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
पाकिस्तान बॉर्डर के समानांतर गुजरता है रूट
कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र से गुजरता है और पाकिस्तान सीमा के नजदीकी इलाकों को भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देता है. सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से स्थानीय परिवहन और लॉजिस्टिक्स को फायदा मिल सकता है. आपातकालीन परिस्थितियों में किसी भी रणनीतिक उपयोग से जुड़े पहलू अलग सरकारी आवश्यकताओं और प्रोटोकॉल पर निर्भर करेंगे.
पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे राजस्थान के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर कर सकता है. बीकानेर, जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के अन्य पर्यटन स्थलों तक पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत से सड़क यात्रा आसान होगी. इससे शेखावाटी, बीकानेर, जोधपुर और जैसलमेर जैसे पर्यटन सर्किट को जोड़ने में भी मदद मिल सकती है.
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एक्सप्रेसवे पर हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम
कॉरिडोर को आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस करने की योजना है. Advanced Traffic Management System (ATMS) के जरिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग, आपात स्थिति में सहायता और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य है. इसके अलावा आपातकालीन सुविधाओं के लिए इमरजेंसी बॉक्स सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित/विकसित की जा रही हैं. अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर पूरा होने और इसके सभी प्रमुख लिंक चालू होने के बाद उत्तर भारत से गुजरात के औद्योगिक एवं बंदरगाह क्षेत्रों तक सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. दिल्ली से सीधे इस कॉरिडोर पर चढ़ने के बजाय विभिन्न इंटरचेंज और लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए पहुंच बनाई जाएगी. इससे दिल्ली-जामनगर यात्रा के लिए एक वैकल्पिक तेज रूट उपलब्ध होगा.


