Delhi High Court on Vimal Elaichi: विमल इलायची ब्रांड बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिका में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की ओर से अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई है. जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने प्रारंभिक तौर पर मामले की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र यानी ज्यूरिस्डिक्शन के सवाल पर दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा.
कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट से महाराष्ट्र FDA की ओर से जारी नोटिस रद्द करने की मांग की है. यह विवाद उस विज्ञापन अभियान से जुड़ा है, जिसमें तीनों अभिनेता एक चबाने वाली इलायची ब्रांड का प्रचार करते नजर आए हैं. महाराष्ट्र FDA का आरोप है कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के तौर पर काम करता है.
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महाराष्ट्र FDA के नोटिस को कंपनी ने दी चुनौती
PB Agro की ओर से सीनियर एडवोकेट दयान कृष्णन और मोहित माथुर ने अदालत में दलील दी कि 11 अगस्त 2026 को जारी शो-कॉज नोटिस सीधे ब्रांड एंबेसडर्स को भेजा गया, कंपनी को नहीं.कंपनी का कहना है कि विज्ञापन अभियान से जुड़े किसी भी आदेश का सीधा असर उस पर पड़ेगा. ऐसे में नोटिस कंपनी को भी जारी किया जाना चाहिए था. कंपनी ने महाराष्ट्र FDA के विज्ञापन बंद कराने के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया.
‘सरोगेट विज्ञापन’ के आरोप का विरोध
PB Agro ने अदालत में सरोगेट विज्ञापन के आरोपों को आधारहीन बताया. कंपनी की ओर से कहा गया कि जिस पान मसाला से इस ब्रांड को जोड़ा जा रहा है, उसका निर्माण या बिक्री महाराष्ट्र में वर्ष 2001 से नहीं हुई है.कंपनी ने यह भी दलील दी कि तंबाकू युक्त पान मसाला पर सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के फैसले के बाद देशभर में रोक लगाई जा चुकी है. महाराष्ट्र FDA की ओर से कथित तौर पर ब्रांड एंबेसडर्स से ऐसे दस्तावेज मांगे गए थे, जिनसे यह साबित हो सके कि चबाने वाली इलायची प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों से अलग है. नियामक ने विज्ञापन अभियान रोकने और डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने की मांग भी की थी.
CCPA भी कर रहा है अलग से जांच
कंपनी ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) भी इसी तरह के आरोपों से जुड़े मामले की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहा है. हालांकि, कंपनी के मुताबिक CCPA ने विज्ञापन अभियान के खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं किया है. कंपनी ने इसी आधार पर अपने पक्ष को अदालत के सामने रखा.
केंद्र सरकार ने कहा- याचिका दिल्ली HC में सुनवाई योग्य नहीं
वहीं, केंद्र सरकार और CCPA की ओर से पेश अधिवक्ता रुखमणी बोबडे ने याचिका की सुनवाई योग्यता का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि अगर महाराष्ट्र FDA ने नोटिस जारी किया है तो उसे चुनौती देने के लिए याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की जानी चाहिए थी. महाराष्ट्र सरकार, जिसने संबंधित शो-कॉज नोटिस जारी किया है, दिल्ली हाईकोर्ट के सामने पक्षकार के तौर पर मौजूद नहीं है. केंद्र और CCPA की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि CCPA समान आरोपों को लेकर अपनी कार्यवाही कर रहा है, लेकिन उसे महाराष्ट्र FDA की ओर से जारी नोटिस पर कोई आपत्ति नहीं है.
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि महाराष्ट्र सरकार, जिसने शो-कॉज नोटिस जारी किया है, यहां अपने नोटिस का बचाव करने के लिए मौजूद नहीं है.
अब अधिकार क्षेत्र पर आएगा फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने फिलहाल इस सवाल पर फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या दिल्ली हाईकोर्ट महाराष्ट्र FDA की ओर से जारी नोटिस को चुनौती देने वाली PB Agro की याचिका पर सुनवाई कर सकता है? अदालत का फैसला यह तय करेगा कि कंपनी की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में आगे सुनी जाएगी या उसे महाराष्ट्र में संबंधित न्यायिक मंच का रुख करना होगा. फिलहाल मामले में अदालत ने अंतिम फैसला नहीं सुनाया है.


