संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन अब भारत समेत G4 देशों ने इस दिशा में नया प्रस्ताव पेश किया है. भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान के समूह G4 ने संयुक्त राष्ट्र में Security Council Reform के लिए एक “realistic framework” रखने की बात कही है.
यह प्रस्ताव उस समय आया है जब दुनिया में युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकट लगातार बढ़ रहे हैं और कई देश मानते हैं कि वर्तमान UNSC संरचना आज की दुनिया का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती.
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क्या है G4 देशों का नया प्रस्ताव?
G4 देशों ने सुझाव दिया है कि अगर Security Council का विस्तार किया जाता है, तो नए permanent members को शुरुआत में veto power नहीं दी जाए. हालांकि बाद में review period के दौरान इस मुद्दे पर दोबारा फैसला लिया जा सकता है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि Ambassador Harish Parvathaneni ने संयुक्त राष्ट्र में G4 की ओर से बयान देते हुए कहा कि permanent membership के भीतर “sub-category” नहीं होनी चाहिए. इसका मतलब यह है कि G4 देश permanent members के बीच भेदभाव के खिलाफ हैं.
G4 देश कौन-कौन से हैं?
G4 समूह में ये चार देश शामिल हैं:
- भारत
- ब्राज़ील
- जर्मनी
- जापान
ये चारों देश लंबे समय से एक-दूसरे के UNSC permanent seat bid का समर्थन करते रहे हैं. इन देशों का तर्क है कि:
- मौजूदा UNSC संरचना 1945 की geopolitical reality पर आधारित है
- आज की वैश्विक शक्ति संरचना काफी बदल चुकी है
- विकासशील देशों और Global South को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है
अभी UNSC में कितने Permanent Members हैं?
फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 permanent members शामिल हैं:
- अमेरिका
- रूस
- चीन
- ब्रिटेन
- फ्रांस
इन पांचों देशों के पास veto power है, यानी वे किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकते हैं. यही veto system UNSC reforms में सबसे बड़ा विवाद माना जाता है.
भारत क्यों चाहता है Permanent Seat?
भारत लंबे समय से UNSC में permanent membership की मांग कर रहा है. इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं:
- दुनिया की सबसे बड़ी आबादी
- तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
- Nuclear power status
- Peacekeeping missions में बड़ा योगदान
- Global South की मजबूत आवाज
भारत का कहना है कि मौजूदा UNSC संरचना वैश्विक वास्तविकताओं को सही तरीके से नहीं दर्शाती.
क्या बदल सकता है नया मॉडल?
G4 प्रस्ताव के अनुसार UNSC को 25 या 26 सदस्यों तक बढ़ाने की चर्चा है. इसमें:
- नए permanent seats
- अतिरिक्त non-permanent seats
- Africa, Asia-Pacific और Latin America को ज्यादा प्रतिनिधित्व
देने का सुझाव शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे UN ज्यादा representative और balanced बन सकता है.
किन देशों को है G4 प्रस्ताव से आपत्ति?
हालांकि सभी देश इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं. “Uniting for Consensus” नाम का एक समूह G4 मॉडल का विरोध करता है. इसमें पाकिस्तान, इटली, दक्षिण कोरिया और कुछ अन्य देश शामिल हैं.
इन देशों का मानना है कि permanent membership बढ़ाने की बजाय temporary seats बढ़ाई जानी चाहिए.
क्या वास्तव में हो पाएगा UNSC Reform?
विशेषज्ञों के अनुसार UNSC reform बेहद जटिल प्रक्रिया है क्योंकि UN Charter में बदलाव के लिए:
- General Assembly approval
- और P5 देशों की सहमति
दोनों जरूरी होती हैं. यही वजह है कि दशकों से चर्चा होने के बावजूद अब तक कोई बड़ा बदलाव लागू नहीं हो पाया है.
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भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
भारत लगातार खुद को Global South की आवाज और emerging global power के रूप में पेश कर रहा है. ऐसे में UNSC permanent seat को भारत की global diplomatic ambition का बड़ा हिस्सा माना जाता है. प्रधानमंत्री Narendra Modi भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर UN reforms की जरूरत पर जोर दे चुके हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में UNSC का विस्तार होता है, तो भारत permanent membership का सबसे मजबूत दावेदार बन सकता है.
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