नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026. देश में शहरी नियोजन को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार GIS यानी Geographic Information System आधारित डिजिटल Master Plan तैयार करने पर जोर दे रही है. Ministry of Housing and Urban Affairs यानी MoHUA के अनुसार, AMRUT और AMRUT 2.0 के तहत देश के सैकड़ों शहरों और कस्बों में GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं.
GIS तकनीक के जरिए शहरों में जमीन के इस्तेमाल, परिवहन नेटवर्क, पानी की सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, सार्वजनिक सुविधाओं, पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों और प्रस्तावित Infrastructure की जानकारी को एक साथ देखा और विश्लेषित किया जा सकता है. इससे शहरों के विकास की योजना तैयार करने में मदद मिलती है.
461 शहरों में GIS Master Plan पर काम
AMRUT के तहत GIS आधारित Master Planning Sub-Scheme में देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 461 AMRUT शहरों को शामिल किया गया है.
इनमें से 437 शहरों के लिए Final Geospatial Databases तैयार किए जा चुके हैं. वहीं 404 शहरों के Draft GIS-based Master Plans तैयार हो चुके हैं. इनमें से 292 Master Plans को अंतिम रूप दिया जा चुका है.
इन डिजिटल डेटाबेस में शहरों से जुड़ी अलग-अलग भौगोलिक और Infrastructure संबंधी जानकारी को शामिल किया जाता है. इसका इस्तेमाल भविष्य की शहरी विकास योजनाओं को तैयार करने में किया जा सकता है.
AMRUT 2.0 के तहत 875 कस्बे शामिल
AMRUT 2.0 के तहत 50,000 से 99,999 आबादी वाले Class-II towns के लिए GIS आधारित Master Plan तैयार करने की अलग Sub-Scheme शुरू की गई है.
इसके तहत देश के 875 कस्बों को शामिल किया गया है. अब तक 399 कस्बों के Draft Geospatial Databases तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 100 को Final किया जा चुका है.
इसके अलावा 136 कस्बों के Draft GIS-based Master Plans तैयार हो चुके हैं. इनमें से 93 Master Plans को अंतिम रूप दिया जा चुका है.
इस पहल का उद्देश्य छोटे और मध्यम आकार के शहरों में भी आधुनिक तकनीक के जरिए बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा देना है.
GIS से शहरों की पूरी तस्वीर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर
GIS आधारित Urban Planning में शहर की अलग-अलग तरह की भौगोलिक जानकारी को एक साथ जोड़ा जा सकता है.
इसमें मौजूदा Land Use, Transport Network, Water Supply, Sewerage, Drainage, Public Amenities और Environmentally Sensitive Areas जैसी जानकारियां शामिल की जा सकती हैं. इसके साथ भविष्य में प्रस्तावित Infrastructure की योजना को भी इसी डेटा के आधार पर तैयार किया जा सकता है.
इससे शहरी विकास से जुड़े अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय की संभावना बढ़ती है और Infrastructure Planning के दौरान उपलब्ध जमीन तथा मौजूदा सुविधाओं की जानकारी आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.
PM Gati Shakti से जोड़े गए Geospatial Databases
MoHUA के अनुसार, AMRUT और AMRUT 2.0 के तहत तैयार किए जा रहे Geospatial Databases को PM Gati Shakti National Master Plan के साथ Integrated किया गया है.
अब तक 343 कस्बों के Geospatial Databases को PM Gati Shakti National Master Plan Portal पर Upload किया जा चुका है.
इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में Infrastructure Planning के लिए डेटा साझा करना और Integrated Planning को बढ़ावा देना है. इससे Transport, Water, Sewerage और अन्य Infrastructure Projects की योजना बनाते समय संबंधित भौगोलिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी.
अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी किसकी होगी
GIS आधारित Master Plan से शहरों की Planning और Monitoring को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केंद्र सरकार सीधे अवैध निर्माण पर कार्रवाई करेगी.
MoHUA के अनुसार, Master Plans, Building Bye-Laws को लागू करना और Unauthorized Construction के खिलाफ कार्रवाई करना संबंधित State Governments, Urban Local Bodies यानी ULBs और Urban Development Authorities के अधिकार क्षेत्र में आता है.
इसलिए अवैध निर्माण पर GIS आधारित Planning का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित एजेंसियां GIS डेटा को कितनी नियमितता से Update करती हैं और उसे Online Building Permission तथा Enforcement Systems के साथ किस तरह जोड़ती हैं.
Satellite और Drone Mapping का इस्तेमाल
GIS आधारित Master Plan तैयार करने के लिए आधुनिक Geospatial Technologies का इस्तेमाल किया जा रहा है.
AMRUT GIS Sub-Scheme के तहत Very High Resolution Satellite यानी VHRS Imagery का इस्तेमाल 1:4000 Scale पर किया जा रहा है. वहीं AMRUT 2.0 GIS Sub-Scheme में 1:4000 Scale की VHRS Imagery के साथ 1:1000 Scale पर Drone और UAV Mapping का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
इन तकनीकों से शहरों और कस्बों के लिए GIS Base Layers तैयार करने में मदद मिलती है. इसके आधार पर Digital Master Plans तैयार किए जा रहे हैं.
हजारों अधिकारियों को दी गई GIS Training
GIS आधारित Urban Planning को लागू करने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और Urban Local Bodies के अधिकारियों की Capacity Building भी की जा रही है.
AMRUT GIS Sub-Scheme के तहत अब तक करीब 2,968 अधिकारियों को 79 Capacity-Building Programmes के जरिए Training दी गई है.
वहीं AMRUT 2.0 GIS Sub-Scheme के तहत करीब 2,648 अधिकारियों को 34 Capacity-Building Programmes के जरिए प्रशिक्षित किया गया है.
इसके अलावा राज्यों और ULBs के लिए Technical Workshops, Training Programmes और Handholding Support भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
URDPFI Guidelines में भी GIS Planning पर जोर
MoHUA ने Urban and Regional Development Plans Formulation and Implementation यानी URDPFI Guidelines भी जारी की हैं.
इन Guidelines में Evidence-Based Urban Planning और Land Management के लिए GIS आधारित Planning Tools तथा Geospatial Technologies को अपनाने को प्रोत्साहित किया गया है.
इसका उद्देश्य शहरों के विकास की योजना तैयार करने में अधिक सटीक डेटा और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है.
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राज्यों और ULBs के साथ लगातार समीक्षा
MoHUA की ओर से GIS आधारित Master Plan की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है. इसके लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और Implementation Agencies के साथ Review Meetings आयोजित की जाती हैं.
इन बैठकों में Master Plan तैयार करने की प्रगति, Geospatial Database, Data Updating और Implementation से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की जाती है.
केंद्र सरकार के अनुसार, इन पहलों से देश में GIS-enabled Digital Planning Ecosystem तैयार करने में मदद मिल रही है, जिसका इस्तेमाल शहरों के Master Plan तैयार करने, उनमें बदलाव करने और उन्हें लागू करने के लिए किया जा सकता है.
यह जानकारी आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने 10 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी.


