नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के दावे पर भारत सरकार ने कड़ा और साफ संदेश दिया है. भारत ने दो टूक कहा है कि रूसी तेल खरीदने के लिए उसे किसी देश की इजाजत की जरूरत नहीं है और यह आयात आगे भी जारी रहेगा. भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि नई दिल्ली किसी भी तरह की शॉर्ट-टर्म छूट पर निर्भर नहीं है. बयान में साफ कहा गया कि भारत कभी भी रूसी तेल खरीदने के लिए किसी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है.
किसी की इजाजत नहीं चाहिए
अमेरिका के उस दावे पर भारत ने कड़ा जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी गई है. भारतीय सरकार ने साफ किया कि रूस से तेल आयात करने का निर्णय भारत का अपना है और यह किसी विदेशी अनुमति या समझौते पर आधारित नहीं है. भारत ने यह भी दोहराया कि वह ऊर्जा सुरक्षा के लिए सभी विकल्प खुले रखेगा.
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सरकारी बयान के अनुसार
फरवरी 2026 में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का सप्लायर बना हुआ है. भारत लगातार रूस से बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल आयात कर रहा है. इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत अपने लिए अपेक्षाकृत सस्ता तेल हासिल कर पा रहा है.
मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है. इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को रोकने की धमकी ने तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली. भारत सरकार ने बताया कि देश के पास संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद है. अधिकारियों के मुताबिक भारत के पास 250 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक है.
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा
यह भंडार किसी भी शॉर्ट-टर्म सप्लाई बाधा के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है.
इसी बीच सरकार ने घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा भी की है. शनिवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर महंगा कर दिया गया, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई तेजी को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है.
ईरान के आत्मसमर्पण पर युद्ध खत्म हो सकता-अमेरिका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 8.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. रिपोर्टों के अनुसार इस सप्ताह के दौरान तेल करीब 30 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार में और उथल-पुथल बढ़ गई जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण ही मिडिल ईस्ट युद्ध को खत्म कर सकता है.
वहीं रूस ने भारत को होने वाले कच्चे तेल निर्यात के आंकड़े सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि कई बुरा चाहने वाले देशों के कारण रूस इन आंकड़ों को गोपनीय रखेगा. यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की बात कही थी.


